राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की रेल परियोजनाओं पर उठे सवाल, रेल मंत्री ने बताया तेज़ी से जारी है विकास कार्य
राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने छत्तीसगढ़ की प्रमुख रेल परियोजनाओं को लेकर राज्यसभा में सवाल उठाए। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा रेल परियोजना सहित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, बजट आवंटन और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में रेल अवसंरचना के विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने संसद के उच्च सदन में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं की प्रगति को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किए। इस पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तृत जवाब देते हुए बताया कि राज्य में कई बड़ी रेल परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है और रेलवे अवसंरचना के विस्तार के लिए रिकॉर्ड स्तर पर बजट उपलब्ध कराया गया है।
सांसद लक्ष्मी वर्मा ने विशेष रूप से खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा नई दोहरी रेल लाइन परियोजना की वर्तमान स्थिति और इसके पूरा होने की समय-सीमा के बारे में जानकारी मांगी। जवाब में रेल मंत्री ने बताया कि 278 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को अप्रैल 2025 में 7,854 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृति दी गई थी। यह परियोजना छत्तीसगढ़ के आठ जिलों से होकर गुजरेगी और इसके लिए लगभग 1,852 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने के लिए इसे विशेष रेलवे परियोजना घोषित किया गया है और अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
सांसद ने यह भी पूछा कि क्या इस रेल मार्ग से बलौदा बाजार जैसे औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने से होने वाले आर्थिक और औद्योगिक लाभों का आकलन किया गया है। रेल मंत्री ने बताया कि परियोजना की योजना बनाते समय इस पहलू का मूल्यांकन किया गया था। इसी के तहत बलौदा बाजार में एक माल गोदाम (गुड्स शेड) विकसित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे सीमेंट और खनिज परिवहन को गति मिलेगी।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नई रेल लाइन बनने से बिलासपुर-रायपुर मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों का दबाव कम होगा। इसके साथ ही बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग जैसे व्यस्त स्टेशनों को बाइपास करने से माल परिवहन अधिक सुगम होगा और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
रेल मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 से 2014 के दौरान जहां औसतन 311 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का बजट मिलता था, वहीं 2026-27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपए हो गया है। इस बढ़े हुए निवेश से नई रेल लाइनों, दोहरीकरण और सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं को गति मिली है।
उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 की स्थिति में राज्य में 36 रेल परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनकी कुल लंबाई 2,398 किलोमीटर और अनुमानित लागत 2,48,202 करोड़ रुपए है। इनमें नई रेल लाइनें और दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। मार्च 2026 तक 1,151 किलोमीटर ट्रैक का निर्माण और कमीशनिंग पूरी की जा चुकी है।
रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, विभिन्न विभागों से मंजूरी, भूगर्भीय परिस्थितियां और कानून-व्यवस्था जैसी चुनौतियां परियोजनाओं की गति को प्रभावित करती हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाने और लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।