राजधानी रायपुर से जारी जानकारी के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में राज्य ने न केवल सर्वाधिक आवास निर्माण पूर्ण किए हैं, बल्कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि राज्य की प्रभावी कार्यप्रणाली और मजबूत योजना क्रियान्वयन का प्रमाण है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा योजना का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। ‘एसएनए स्पर्श’ प्रणाली के माध्यम से राज्य ने वित्तीय प्रबंधन में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और देश में सर्वाधिक व्यय कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में योजना की शुरुआत के बाद से अब तक एक ही वित्तीय वर्ष में सबसे अधिक आवास निर्माण का रिकॉर्ड भी इसी वर्ष दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और योजनाओं के प्रभावी संचालन को दर्शाती है।
इस योजना का प्रभाव केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लोगों की आजीविका और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है। ‘आवास से आजीविका’ पहल के तहत निर्माण सामग्री की आपूर्ति में हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है। इसके परिणामस्वरूप 9000 से अधिक बिहान दीदियाँ “लखपति दीदी” बनकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं।
इसके अलावा, इस वर्ष 6000 से अधिक राजमिस्त्रियों को आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है, जो देश में सबसे अधिक है। इन प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों में 1400 महिलाएं और 400 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली भी शामिल हैं, जो अब मुख्यधारा में जुड़कर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से भी आवास हितग्राहियों को रोजगार से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए गए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण विकास और गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लोगों के पक्के घर का सपना पूरा हो रहा है, साथ ही उन्हें सम्मान और आत्मनिर्भरता भी मिल रही है।
उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ आगे भी इसी तरह विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा और देश में अपनी अलग पहचान बनाए रखेगा।
कुल मिलाकर, यह उपलब्धि न केवल राज्य के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह दर्शाती है कि सही योजना और प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।