ईमानदारी और सेवा का प्रतीक: एसीएफ अखिलेश मिश्रा सेवानिवृत्त, ‘वन रक्षक’ से ‘वन संरक्षक’ तक का प्रेरक सफर

कोरिया वन मंडल के सहायक वन संरक्षक अखिलेश मिश्रा 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए। वन रक्षक से एसीएफ तक का उनका सफर ईमानदारी, समर्पण और वन संरक्षण के लिए मिसाल माना जा रहा है।

Mar 31, 2026 - 18:42
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ईमानदारी और सेवा का प्रतीक: एसीएफ अखिलेश मिश्रा सेवानिवृत्त, ‘वन रक्षक’ से ‘वन संरक्षक’ तक का प्रेरक सफर

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के वन विभाग में एक युग का अंत हो गया, जब सहायक वन संरक्षक अखिलेश मिश्रा 31 मार्च 2026 को अपनी लंबी और गौरवशाली सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने ईमानदारी, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

अखिलेश मिश्रा का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘वन रक्षक’ जैसे शुरुआती पद से की थी और कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए अपनी मेहनत और लगन के बल पर सहायक वन संरक्षक (ACF) के पद तक पहुंचे। उनका यह सफर इस बात का प्रमाण है कि निरंतर परिश्रम और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

वन्यजीवों के संरक्षण के क्षेत्र में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने जंगलों में पानी की कमी को दूर करने के लिए कई तालाब और जलस्रोत तैयार करवाए। इससे गर्मी के मौसम में वन्यजीवों को पानी की तलाश में गांवों की ओर जाने की जरूरत नहीं पड़ी और मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आई।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार के क्षेत्र में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। कोरिया के चामट पहाड़ को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित कर उन्होंने इसे पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया। इससे न केवल क्षेत्र की पहचान बढ़ी, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदाय को रोजगार के नए अवसर भी मिले। इसी तरह आनंदपुर में विकसित नर्सरी और पार्क उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।

अखिलेश मिश्रा ने वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने दूरस्थ वन ग्रामों तक सड़कों का निर्माण सुनिश्चित कराया, जिससे वहां के लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच आसान हुई।

जहां एक ओर वे सरल और मिलनसार स्वभाव के थे, वहीं वन अपराधों के खिलाफ उनका रुख बेहद सख्त रहा। उन्होंने अवैध कटाई और अतिक्रमण के खिलाफ कई प्रभावी अभियान चलाए। उनके नेतृत्व में वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया और जंगलों की सुरक्षा को मजबूत किया गया।

वनाग्नि को रोकने के लिए भी उन्होंने कई नवाचार किए और जनजागरूकता अभियान चलाए, जिसकी सराहना पूरे प्रदेश में हुई।

उनकी सेवानिवृत्ति के साथ वन विभाग ने एक ऐसे अधिकारी को विदा किया है, जिसने अपने कार्यकाल में न केवल विभाग की गरिमा को बढ़ाया, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

अखिलेश मिश्रा का जीवन और कार्य यह संदेश देता है कि ईमानदारी, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ किया गया कार्य हमेशा समाज में एक मिसाल बनता है।