धर्मांतरण स्वतंत्रता विधेयक 2026 का गांड़ा समाज ने किया समर्थन, प्रेस वार्ता में जताया आभार

रायपुर में उत्कल गांड़ा महिला महामंच ने धर्मांतरण स्वतंत्रता विधेयक 2026 का समर्थन करते हुए इसे समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।

Apr 9, 2026 - 19:30
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धर्मांतरण स्वतंत्रता विधेयक 2026 का गांड़ा समाज ने किया समर्थन, प्रेस वार्ता में जताया आभार

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। रायपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उत्कल गांड़ा महिला महामंच ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लाए गए धर्मांतरण स्वतंत्रता विधेयक 2026 का खुलकर समर्थन किया। संगठन की प्रदेश अध्यक्ष सावित्री जगत ने इसे धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताया।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सावित्री जगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित यह विधेयक अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने से प्रदेश में अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में गांवों और शहरी झुग्गी-बस्तियों में गरीब और भोले-भाले लोगों को गुमराह कर उनके धर्म परिवर्तन के मामले सामने आ रहे थे। इससे न केवल सामाजिक असंतुलन उत्पन्न हो रहा था, बल्कि समाज में तनाव भी बढ़ रहा था।

सावित्री जगत ने इस विधेयक का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस निर्णय के लिए बधाई और आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कानून विशेष रूप से गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्गों की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक आस्था की रक्षा करेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि संगठन इस कानून को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएगा। इसके तहत झुग्गी-बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। जागरूकता रैलियां, गोष्ठियां, पंपलेट वितरण और नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से लोगों तक जानकारी पहुंचाई जाएगी, ताकि कोई भी व्यक्ति गलत जानकारी के कारण प्रभावित न हो।

सावित्री जगत ने कहा, “छत्तीसगढ़ सरकार ने समाज के कमजोर वर्गों के हित में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। हम सभी मिलकर इस कानून को जमीनी स्तर पर सफल बनाने का प्रयास करेंगे।”

प्रेस वार्ता में संगठन के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें किशोर महानंद, बसंत बाग, बनमाली छूरा, आशीष तांडी, प्रीति सागर, हेमा सागर और मेनका बघेल शामिल थे। सभी ने एक स्वर में इस विधेयक का समर्थन करते हुए इसे समाज के लिए सकारात्मक कदम बताया।

कुल मिलाकर, गांड़ा समाज द्वारा इस विधेयक का समर्थन यह दर्शाता है कि समाज के विभिन्न वर्ग इस कानून को लेकर अपनी राय और भागीदारी दर्ज करा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कानून का क्रियान्वयन किस प्रकार होता है और इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है।