छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध हास्य कलाकार सुभाष उमरे का निधन, कला जगत में शोक की लहर
छत्तीसगढ़ के जाने-माने हास्य कलाकार सुभाष उमरे का 1 अप्रैल 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से लोककला और नाचा मंच से जुड़े कलाकारों में गहरा शोक व्याप्त है।
UNITED NEWS OF ASIA. हेमंत पाल, धमधा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और हास्य परंपरा को नई पहचान दिलाने वाले सुप्रसिद्ध हास्य कलाकार और लाफ्टर लेखक सुभाष उमरे का 1 अप्रैल 2026 की शाम निधन हो गया। उनके निधन की खबर से न केवल दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वे अपने पीछे हंसी और खुशियों की ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसे भुला पाना आसान नहीं होगा।
दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम लिटिया सेमरिया में 1 मार्च 1959 को जन्मे सुभाष उमरे बचपन से ही हंसमुख स्वभाव के थे। परिवार और आसपास के लोगों को हंसाना उनका स्वभाव ही नहीं, बल्कि उनका जुनून बन गया था। वे सात भाइयों में तीसरे स्थान पर थे और परिवार में उनकी विशेष पहचान थी। उनके भाई अजय उमरे के अनुसार, सुभाष उमरे बचपन से ही अपनी चुटीली बातों और हास्य शैली से लोगों का मन मोह लेते थे।
सुभाष उमरे ने छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य और नाचा मंचों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से हजारों लोगों को वर्षों तक हंसाया और मनोरंजन किया। उनकी कॉमेडी में देसी अंदाज, सहजता और सामाजिक व्यंग्य का अनूठा संगम देखने को मिलता था, जो दर्शकों को तुरंत अपनी ओर आकर्षित कर लेता था।
उन्होंने चंदैनी गोंदा, लोकरंग अर्जुंदा और संत समाज हटूवा जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन मंचों के जरिए उन्होंने गांव-गांव तक अपनी पहचान बनाई और लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी हर प्रस्तुति दर्शकों के लिए यादगार बन जाती थी।
सुभाष उमरे ने छत्तीसगढ़ के कई प्रसिद्ध कलाकारों जैसे पप्पू चंद्राकर, कुलेश्वर ताम्रकार और घेवर यादव के साथ मंच साझा किया। इन कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी बेहद लोकप्रिय रही। जैसे ही वे मंच पर आते, पूरा माहौल ठहाकों से गूंज उठता था। उनकी टाइमिंग और संवाद अदायगी इतनी सटीक होती थी कि दर्शक हंसी रोक नहीं पाते थे।
उनके निधन से छत्तीसगढ़ की लोककला और हास्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। कलाकारों, प्रशंसकों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया है। सभी का कहना है कि सुभाष उमरे जैसे कलाकार विरले ही होते हैं, जो अपनी कला से लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं।
आज उनके पैतृक गांव सेमरिया के मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे। उनके चाहने वालों की आंखें नम हैं, लेकिन उनके चेहरे पर सुभाष उमरे की यादों की मुस्कान भी है।
सुभाष उमरे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी हास्य कला, उनकी प्रस्तुति और उनके द्वारा दिए गए अनगिनत हंसी के पल हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।