किसानों, गरीबों और कमजोर वर्गों के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा बजट ‘संकल्प’ – मंत्री राम विचार नेताम
छत्तीसगढ़ सरकार के बजट 2026-27 ‘संकल्प’ को कृषि एवं आदिम जाति विकास मंत्री राम विचार नेताम ने किसानों, गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट कृषि, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के समग्र विकास के साथ राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | कृषि एवं आदिम जाति विकास मंत्री राम विचार नेताम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सदन में प्रस्तुत 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये के बजट ‘संकल्प’ पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट राज्य के किसानों, गरीबों और कमजोर वर्गों के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का चहुंमुखी विकास हो रहा है। विगत वर्षों में प्रस्तुत ‘ज्ञान’ और ‘गति’ बजट के बाद अब ‘संकल्प’ बजट राज्य के निरंतर विकास को नई दिशा देगा। यह बजट यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत–2047 के संकल्पों को पूरा करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
मंत्री नेताम ने कहा कि यह बजट राज्य की संस्कृति और अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ कृषि को मजबूत करने वाला है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में समग्र विकास को गति मिलेगी। जनजातीय सुरगुड़ी स्टूडियो के लिए भी बजट प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की राशि को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ किया गया है, वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। पिछड़ा वर्ग के हित में विभागाध्यक्ष भवन के निर्माण के लिए भी बजट प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये तथा आवास निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जनजाति बहुल ग्राम पंचायतों में बैगा एवं पुजारी के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मंत्री ने कहा कि ये सभी प्रावधान राज्य के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कृषि क्षेत्र पर विशेष जोर देते हुए मंत्री नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि केवल आजीविका नहीं, बल्कि संस्कृति है। उन्होंने बताया कि विगत तीन वर्षों में किसानों के खातों में 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। कृषक उन्नति योजना के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे आधुनिक तकनीक और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। राज्य की सहकारी संस्था छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) को धान उपार्जन के लिए 6 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि कृषि पंपों को निःशुल्क बिजली देने के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आलू प्रदर्शन विकास योजना की शुरुआत होगी तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। डेयरी समग्र विकास योजना के लिए 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों और मजदूरों के दुर्घटना बीमा के लिए भी बजट में व्यवस्था की गई है।
मंत्री नेताम ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के लिए दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 820 करोड़ रुपये, एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम के लिए 170 करोड़ रुपये, कृषक समग्र विकास योजना के लिए 150 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 130 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए 200 करोड़ रुपये, डेयरी विकास के लिए 90 करोड़ रुपये, समग्र पशु संवर्धन योजना के लिए 8 करोड़ रुपये तथा पशुओं को सालभर हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए हरा चारा उत्पादन हेतु 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि यह बजट किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई, बीमा और पशुपालन को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और आदिवासी व पिछड़े वर्गों के उत्थान के माध्यम से समावेशी विकास सुनिश्चित होगा।