बोड़ला–चिल्फी–धवईपानी मार्ग पर वन विभाग की कार्रवाई: तीन ढाबों से अवैध लकड़ी जप्त, तीन प्रकरण दर्ज

वन विभाग कवर्धा ने बोड़ला–चिल्फी–धवईपानी मार्ग पर संचालित होटलों और ढाबों की जांच में तीन ढाबों से अवैध लकड़ी बरामद की। पंजाबी काका ढाबा, मुकेश ढाबा और राय ढाबा से लकड़ी जप्त कर तीन अलग-अलग वन अपराध प्रकरण दर्ज किए गए। विभाग ने भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

Oct 29, 2025 - 11:53
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बोड़ला–चिल्फी–धवईपानी मार्ग पर वन विभाग की कार्रवाई: तीन ढाबों से अवैध लकड़ी जप्त, तीन प्रकरण दर्ज

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। वन विभाग, वनमंडल कवर्धा की टीम ने आज बोड़ला–चिल्फी–धवईपानी मार्ग पर स्थित विभिन्न होटल और ढाबों में व्यापक जांच अभियान चलाया। निरीक्षण के दौरान तीन ढाबा संचालकों के यहां से अवैध लकड़ी उपयोग किए जाने के प्रमाण मिलने पर उनके विरुद्ध तीन अलग-अलग वन अपराध प्रकरण दर्ज किए गए और लकड़ी जप्त की गई।

 

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य होटल और ढाबों में जलाऊ लकड़ी के रूप में अवैध रूप से काटी गई या संग्रहित लकड़ी के उपयोग को रोकना है। जांच में पाया गया कि कई ढाबे केवल सूखी और बिक्री-अयोग्य लकड़ियों का उपयोग कर रहे थे, लेकिन कुछ ढाबों में अवैध लकड़ी के इस्तेमाल के प्रमाण मिले।

जांच दल ने पंजाबी काका ढाबा, ग्राम धवईपानी के संचालक सरदार जसविंदर सिंह के यहां से 2 चट्टा जलाऊ लकड़ी पाए जाने पर पी.ओ.आर. क्रमांक 21614/09 दिनांक 28.10.2025 दर्ज किया।
इसी तरह मुकेश ढाबा, ग्राम धवईपानी की संचालिका फूलबाई के यहां मिश्रित प्रजाति की 28 नग बल्लियाँ मिलने पर पी.ओ.आर. क्रमांक 21614/10 दर्ज किया गया।
वहीं राय ढाबा के संचालक गणेश राय के यहां से 1 चट्टा जलाऊ लकड़ी बरामद होने पर पी.ओ.आर. क्रमांक 21614/11 दर्ज किया गया।

वन अधिकारियों ने सभी ढाबा संचालकों को सख्त चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी ढाबे में अवैध लकड़ी का उपयोग करते पाया गया, तो उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार के निरीक्षण अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे ताकि वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखा जा सके। इस कार्रवाई से स्थानीय व्यवसायियों में सजगता बढ़ी है तथा अवैध लकड़ी व्यापार पर अंकुश लगाने की दिशा में यह कदम प्रभावी साबित हो रहा है।

वन विभाग की यह पहल वन अपराधों के नियंत्रण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जिम्मेदार व्यावसायिक प्रथाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक ठोस प्रयास मानी जा रही है।