बिलासपुर में पुलिस की वसूली का खेल उजागर: एएसआई समेत तीन जवान लाइन अटैच

बिलासपुर के मस्तूरी थाना क्षेत्र में ढाबा संचालक से अवैध वसूली और झूठे केस में फंसाने की धमकी देने के आरोप में तीन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई। एसएसपी रजनेश सिंह ने एएसआई सहित तीनों को लाइन अटैच कर जांच के आदेश दिए हैं।

Apr 14, 2026 - 17:19
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बिलासपुर में पुलिस की वसूली का खेल उजागर: एएसआई समेत तीन जवान लाइन अटैच

UNITED NEWS OF ASIA. बिलासपुर l छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। मस्तूरी थाना क्षेत्र में ढाबा संचालक से अवैध वसूली और झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने के आरोप में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है।

इस पूरे मामले में रजनेश सिंह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एएसआई सहित तीनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर जांच के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मस्तूरी थाना क्षेत्र के दर्रीघाट स्थित एक ढाबे पर पुलिस टीम ने दबिश दी थी। इस टीम में एएसआई शिव चंद्रा, आरक्षक शशिकरण कुर्रे और एसडीओपी शिवधन बंजारे शामिल थे। आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने ढाबा संचालक को पकड़कर थाने ले जाने के बजाय थाने के पीछे स्थित एक पुराने खंडहरनुमा मकान में ले जाकर रखा।

यहां पुलिसकर्मियों ने ढाबा संचालक पर अवैध रूप से शराब बेचने का आरोप लगाते हुए उसे आबकारी एक्ट के तहत जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद बिना किसी वैधानिक कार्रवाई के उसे छोड़ने के लिए पैसों की मांग की गई। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी ढाबा संचालक से सौदेबाजी कर रहे थे।

इसी दौरान इस पूरे घटनाक्रम की भनक थाने के अन्य पुलिसकर्मियों को लग गई। मामला उजागर होने की आशंका को देखते हुए ढाबा संचालक को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। इसके बाद पीड़ित ढाबा संचालक ने हिम्मत दिखाते हुए पूरे मामले की शिकायत सीधे एसएसपी से की।

शिकायत में ढाबा संचालक ने बताया कि उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर पैसों की मांग की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह ने तत्काल प्रभाव से एएसआई शिव चंद्रा, आरक्षक शशिकरण कुर्रे और शिवधन बंजारे को लाइन अटैच कर दिया।

इस कार्रवाई के साथ ही एसएसपी ने जिले में अन्य पुलिसकर्मियों के तबादले के आदेश भी जारी किए हैं। इनमें एएसआई ढोलाराम मरकाम को पुलिस लाइन से मस्तूरी, मनोज यादव को पुलिस लाइन से सिविल लाइन तथा आरक्षक अरविंद अनंत को कोटा से सीपत स्थानांतरित किया गया है।

यह मामला पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता की ओर इशारा करता है। आम जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन पुलिसकर्मियों पर होती है, यदि वही इस तरह के कृत्यों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है।

हालांकि, एसएसपी द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि विभाग में अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कठोर कदम उठाए जाते हैं।

यह घटना न केवल पुलिस विभाग के लिए एक चेतावनी है, बल्कि आम जनता के लिए भी यह भरोसा जगाती है कि शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है।