बीजापुर: नक्सलियों के 'किले' पर लहराया तिरंगा! कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर आजादी के बाद पहली बार हुआ ध्वजारोहण

बीजापुर के धुर नक्सल प्रभावित कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया। IED ब्लास्ट में 10 जवानों के घायल होने के बावजूद, CRPF और कोबरा बटालियन ने नक्सलियों के गढ़ में गणतंत्र दिवस मनाया।

Jan 26, 2026 - 12:17
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बीजापुर: नक्सलियों के 'किले' पर लहराया तिरंगा! कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर आजादी के बाद पहली बार हुआ ध्वजारोहण

नक्सलियों के गढ़ में गूंजा राष्ट्रगान, कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर पहली बार लहराया तिरंगा

 UNITED NEWS OF ASIA. पी सतीश कुमार, बीजापुर | छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर से एक ऐतिहासिक और गर्व करने वाली खबर सामने आ रही है। धुर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले की कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर आज़ादी के 78 वर्षों के बाद पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया है। यह वही इलाका है जिसे नक्सलियों का अजेय किला माना जाता था, लेकिन सुरक्षा बलों के अदम्य साहस ने आज यहाँ लोकतंत्र की जीत का बिगुल फूंक दिया है।

जवानों का जज्बा: हमले के बाद भी नहीं डिगे कदम

उल्लेखनीय है कि महज 24 घंटे पहले, इसी कर्रेगुट्टा पहाड़ पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक IED ब्लास्ट में सुरक्षा बलों के 10 जवान घायल हो गए थे। नक्सलियों ने इस राष्ट्रीय पर्व में खलल डालने की पूरी कोशिश की, लेकिन जवानों के हौसले नहीं टूटे।

ताड़पाला कैम्प में भव्य समारोह

ताड़पाला कैम्प पर तैनात CRPF की 196 बटालियन और कोबरा (CoBRA) की 204 बटालियन के जांबाज जवानों ने आज सुबह कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर तिरंगा फहराकर उसे सलामी दी। घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बीच राष्ट्रगान की गूंज ने यह साफ कर दिया कि अब बस्तर के इन अंदरूनी इलाकों में नक्सलियों का नहीं, बल्कि संविधान का शासन चलेगा।

ऐतिहासिक क्षण का महत्व

  • पहली बार ध्वजारोहण: आजादी के बाद से अब तक यहाँ तिरंगा नहीं फहराया जा सका था।

  • नक्सलवाद पर चोट: यह कार्रवाई नक्सलियों के मनोबल पर करारी चोट मानी जा रही है।

  • क्षेत्र में खुशी: दक्षिण बस्तर के इस दूरस्थ अंचल में जवानों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर धूमधाम से गणतंत्र दिवस मनाया।