तेलंगाना डीजीपी के सामने 48 नक्सलियों के साथ बरसा देवा ने किया सरेंडर, 75 लाख का था इनाम
कुख्यात नक्सली नेता बरसा देवा ने अपने 48 साथियों के साथ तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। बरसा देवा, जो माओवादी संगठन के लिए महत्वपूर्ण हथियार सप्लायर था और हिड़मा का उत्तराधिकारी माने जाते थे, पर 75 लाख रुपये का इनाम था। यह सरेंडर माओवादी संगठन को एक बड़ा झटका माना जा रहा है
UNITED NEWS OF ASIA. तेलंगाना डीजीपी के सामने 48 नक्सलियों के साथ बरसा देवा का सरेंडर, माओवादियों को बड़ा झटका
रायपुर, 3 जनवरी 2026: माओवादी संगठन को एक बड़ा झटका उस समय लगा जब कुख्यात नक्सली नेता बरसा देवा ने तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक शिवधर रेड्डी के समक्ष अपने 48 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। बरसा देवा, जो हिड़मा के उत्तराधिकारी माने जाते थे, पर माओवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा 75 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
बरसा देवा और उनके साथियों के सरेंडर के साथ ही माओवादी संगठन को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि देवा को नक्सलियों के लिए अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति और आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने में प्रमुख भूमिका निभानी थी। पुलिस के अनुसार, वह माओवादी संगठन के लिए हथियारों के विशेषज्ञ थे और लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
बरसा देवा की गिरफ्तारी माओवादी संगठन के लिए एक बड़ी क्षति है, क्योंकि वह PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। उनके सरेंडर के साथ इस बटालियन का पूरी तरह से विघटन हो गया है, जो अब तक माओवादी संगठनों का सबसे घातक समूह माना जाता था।
डीजीपी शिवधर रेड्डी ने बताया कि सभी नक्सलियों को सरकारी पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी। आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक नक्सली को 25,000 रुपये का चेक प्रदान किया गया है। इसके अलावा, इन नेताओं पर जो इनाम घोषित किया गया था, वह उन्हें नियमों के अनुसार प्रदान किया जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सरेंडर?
बरसा देवा का सरेंडर छत्तीसगढ़ और तेलंगाना सीमा पर सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है। देवा और उनके साथियों का आत्मसमर्पण इस क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हिड़मा के निधन के बाद, देवा ही वह प्रमुख चेहरा थे, जो सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए थे।
बरसा देवा और उसके साथियों के एक साथ आत्मसमर्पण से यह स्पष्ट हो गया है कि अब माओवादी गतिविधियां इस इलाके में लगभग समाप्त हो चुकी हैं। इन समर्पणों से न केवल माओवादी संगठन का नेटवर्क कमजोर हुआ है, बल्कि अब यह क्षेत्र सुरक्षात्मक दृष्टि से कहीं अधिक शांतिपूर्ण और नियंत्रित महसूस होता है।
यह सरेंडर माओवादी संगठनों के खिलाफ भारत सरकार की नक्सलवाद विरोधी नीति की सफलता की ओर एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो इन क्षेत्रों में शांति और स्थिरता लाने के लिए लगातार प्रयासरत है।