MSME को मज़बूत करने के लिए बैंकों को ज़मीनी स्तर पर सक्रिय होना होगा: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
लोकसभा की एस्टीमेट कमेटी की बैठक में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने MSME क्षेत्र को गति देने के लिए बैंकों से ज़मीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने पहली पीढ़ी के उद्यमियों को प्राथमिकता, संतुलित ऋण वितरण और सरल बैंकिंग प्रक्रिया पर जोर दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल शनिवार को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में आयोजित लोकसभा की एस्टीमेट कमेटी की बैठक में शामिल हुए। बैठक का मुख्य विषय “MSME क्षेत्र को बढ़ावा देने में बैंकों की भूमिका” रहा।
बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक एवं उद्यमशीलता की अपार संभावनाओं वाले राज्यों में बैंकिंग सहायता की प्रभावशीलता की समीक्षा की गई। इस दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि MSME भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यदि बैंक प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण अपनाएं तो स्थानीय युवाओं, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
उन्होंने बैंकों को स्पष्ट सुझाव देते हुए कहा कि:
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पहली पीढ़ी के उद्यमियों को ऋण देते समय अनावश्यक औपचारिकताओं से बचा जाए।
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स्टार्टअप, सर्विस सेक्टर, रिसर्च आधारित उद्यम और नए जमाने के व्यवसायों को MSME के रूप में मान्यता दी जाए।
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PM विश्वकर्मा, PM मुद्रा जैसी योजनाओं के तहत पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध ऋण उपलब्ध कराया जाए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, “छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों में टैलेंट और संसाधनों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो केवल बैंकों की सकारात्मक सोच और संतुलित नीति की। बड़े उद्योगों और MSME—दोनों को समान महत्व देकर ही समावेशी विकास संभव है।”
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि क्रेडिट-टू-डिपॉजिट (CD) अनुपात में सुधार के साथ-साथ स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ऋण उत्पाद विकसित किए जाएं। साथ ही ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों, विशेषकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में, शाखा स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाई जाए।
समिति के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, अंडमान-निकोबार में CD अनुपात वर्ष 2020-21 में 52.15% से बढ़कर 2024-25 में 59.65% हो गया है। इस प्रगति का उल्लेख करते हुए सांसद अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह बैंकिंग कवरेज और ऋण प्रवाह को तेज़ करने की आवश्यकता है, ताकि MSME क्षेत्र को वास्तविक लाभ मिल सके।
बैठक में यह भी सुझाव रखा गया कि PM मुद्रा योजना के अंतर्गत माइक्रो और छोटे गैर-कॉरपोरेट व्यवसायों को ₹20 लाख तक का बिना गारंटी ऋण सभी क्षेत्रों—जैसे इवेंट मैनेजमेंट, कंसल्टेंसी, ब्यूटी-मेकअप, प्रोफेशनल सर्विसेज आदि—में सरल प्रक्रिया के साथ उपलब्ध कराया जाए।
अंत में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के विज़न को साकार करने के लिए बैंकों को केवल आंकड़ों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी, जिससे छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में आर्थिक विकास और रोज़गार के नए अवसर सृजित हो सकें।