छपारा में पंचकल्याणक महामहोत्सव के सातवें दिन मोक्ष कल्याणक व गजरथ महोत्सव का भव्य आयोजन

छपारा में आयोजित पंचकल्याणक महामहोत्सव के सातवें दिन मोक्ष कल्याणक एवं गजरथ महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। विश्व शांति महायज्ञ की पूर्णाहुति, गजरथ की सात फेरी और मुनि श्री के प्रवचनों के साथ नगर में उत्सवमय वातावरण देखने को मिला।

Jan 21, 2026 - 11:56
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छपारा में पंचकल्याणक महामहोत्सव के सातवें दिन मोक्ष कल्याणक व गजरथ महोत्सव का भव्य आयोजन

UNITED NEWS OF ASIA. आरिफ मोहम्मद, सिवनी | जिले के छपारा नगर में आयोजित पंचकल्याणक महामहोत्सव के सातवें दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस पावन अवसर पर नगर में मोक्ष कल्याणक एवं गजरथ महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा क्षेत्र धर्ममय वातावरण में सराबोर हो गया।

सुभाष ग्राउंड, तकिया वार्ड में आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व शांति महायज्ञ की विधिवत पूर्णाहुति संपन्न हुई। इसके पश्चात गजरथ महोत्सव के दौरान गजरथ की सात फेरी कराई गई, जिसे देखने के लिए नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भजन-कीर्तन और धार्मिक जयघोषों के बीच पूरा छपारा नगर उत्सव में डूबा नजर आया।

महामहोत्सव के अंतिम दिवस मुनि 105 नीरज सागर जी महाराज एवं मुनि  105 निर्मदसागर जी महाराज के प्रेरणादायी प्रवचन हुए। मुनि  ने अपने प्रवचनों में मोक्ष कल्याणक के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए सत्य, अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनके वचनों ने श्रद्धालुओं के हृदय में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया।

कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी विधिपूर्वक संपन्न हुए। समारोह के दौरान वेदी प्रतिष्ठा, श्रीजी स्थापना, कलशारोहण, ध्वजारोहण, अभिषेक एवं भोज प्रसादी वितरण किया गया। इन सभी आयोजनों में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई और पुण्य लाभ अर्जित किया।

इस भव्य धार्मिक आयोजन में सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन एवं केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों ने आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बताया।

पंचकल्याणक महामहोत्सव के सातवें दिन के इस आयोजन से नगर में धार्मिक ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ। हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता और अनुशासित आयोजन ने छपारा को एक भव्य धार्मिक नगरी का स्वरूप प्रदान किया। यह आयोजन न केवल जैन समाज बल्कि समूचे क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा।