फाइलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ की ओर निर्णायक पहल, 10 फरवरी से घर-घर व बूथों पर खिलाई जाएंगी फाइलेरियारोधी दवाएं
छत्तीसगढ़ में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 10 फरवरी 2026 से सामूहिक दवा सेवन अभियान शुरू होगा। राज्य के 18 जिलों में घर-घर और बूथों के माध्यम से शत-प्रतिशत लाभार्थियों को फाइलेरियारोधी दवाओं का सेवन सुनिश्चित किया जाएगा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह,रायपुर | छत्तीसगढ़ को फाइलेरिया रोग से स्थायी रूप से मुक्त करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा एक निर्णायक पहल की जा रही है। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में 10 फरवरी 2026 से सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) अभियान की शुरुआत होगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लक्षित शत-प्रतिशत जनसंख्या को स्वास्थ्य कर्मियों की प्रत्यक्ष निगरानी में फाइलेरियारोधी दवाओं का सेवन कराना है, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ा जा सके।
एमडीए अभियान की प्रभावी तैयारी के लिए 20 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य भवन, अटल नगर, रायपुर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में 7 जिलों के जिला मलेरिया अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी, वीबीडी सलाहकार एवं टेक्निकल सुपरवाइजरों ने भाग लिया। भारत सरकार के संयुक्त निदेशक, एनसीवीबीडीसी, डॉ. रिंकू शर्मा ने वर्चुअल माध्यम से प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए तकनीकी और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान किया।
प्रशिक्षण कार्यशाला में संचालक, महामारी नियंत्रण डॉ. सुरेन्द्र पामभोई, क्षेत्रीय संचालक डॉ. संदीप जोगदंड, सीएमओ डॉ. सरीफ, राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जीतेन्द्र कुमार तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान माइक्रोप्लानिंग, दवा एवं लॉजिस्टिक प्रबंधन, रिपोर्टिंग व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक जागरूकता, मीडिया समन्वय एवं अंतरविभागीय सहयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बताया गया कि यह अभियान राज्य के 18 जिलों के 65 विकासखंडों में संचालित किया जाएगा। 15 जिलों में आईवरमेक्टिन, डीईसी एवं एल्बेंडाजोल (आईडीए) के माध्यम से दवा सेवन कराया जाएगा, जबकि बस्तर, राजनांदगांव और खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिलों में डीईसी एवं एल्बेंडाजोल (डीए) का उपयोग किया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 1 करोड़ 58 लाख से अधिक आबादी को घर-घर जाकर तथा बूथों के माध्यम से दवा खिलाई जाएगी।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि एमडीए केवल दवा वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि शत-प्रतिशत दवा सेवन इसकी सफलता की कुंजी है। यदि कोई लाभार्थी छूट जाता है, तो दोबारा जाकर उसे दवा सेवन कराया जाएगा।
यह अभियान शासन, स्वास्थ्य तंत्र और जनभागीदारी के समन्वित प्रयास का उदाहरण है, जो छत्तीसगढ़ को फाइलेरिया मुक्त राज्य बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।