लगातार दो साल की कड़ी मेहनत के बाद निकिता बंजारे का एसएससी जीडी आईटीबीपी में चयन, बनीं क्षेत्र की प्रेरणा

पलारी निवासी निकिता बंजारे ने लगातार दो वर्षों की कठिन मेहनत और अनुशासन के बल पर एसएससी जीडी के माध्यम से आईटीबीपी में चयन प्राप्त किया। उनकी सफलता से परिवार और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

Jan 21, 2026 - 11:29
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लगातार दो साल की कड़ी मेहनत के बाद निकिता बंजारे का एसएससी जीडी आईटीबीपी में चयन, बनीं क्षेत्र की प्रेरणा

 UNITED NEWS OF ASIA.परस साहू,बालोद | कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट संकल्प से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, यह बात पलारी निवासी निकिता बंजारे ने साबित कर दिखाई है। लगातार दो वर्षों तक कठिन परिश्रम और समर्पण के बाद निकिता बंजारे का चयन एसएससी जीडी के माध्यम से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में हर्ष और गर्व का माहौल है।

निकिता बंजारे गुरुर सतनामी समाज के अध्यक्ष कृष्ण बंजारे की पुत्री हैं। बचपन से ही उनमें कुशाग्र बुद्धि और देश के प्रति प्रेम की भावना स्पष्ट दिखाई देती थी। देश सेवा का जज्बा उनके मन में शुरू से ही था, जिसके चलते उन्होंने सेना और अर्धसैनिक बलों में जाने का लक्ष्य तय किया। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने निरंतर मेहनत, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास को अपना आधार बनाया।

एसएससी जीडी जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाना आसान नहीं होता। इसके लिए शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक तीनों स्तर पर मजबूत होना आवश्यक है। निकिता ने लगातार दो वर्षों तक स्वयं को पूरी तरह अनुशासित रखते हुए तैयारी की। कई बार असफलता और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके इसी धैर्य और दृढ़ निश्चय ने उन्हें सफलता तक पहुंचाया।

निकिता की सफलता से यह स्पष्ट होता है कि आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे हजारों युवतियों और छात्राओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं, जो देश सेवा का सपना देखती हैं। उनकी यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत संदेश देती है।

अपनी सफलता का श्रेय देते हुए निकिता बंजारे ने अपने माता-पिता और परिवारजनों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परिवार के निरंतर सहयोग और विश्वास ने उन्हें हर कठिन समय में आगे बढ़ने की ताकत दी। साथ ही उन्होंने उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उन्हें समय-समय पर प्रेरित किया। विशेष रूप से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरणा देने वाले मोटिवेशनल आदित्य टंडन, योग गुरु और निषाद सर का उन्होंने आभार जताया।

निकिता बंजारे की यह सफलता कहानी यह सिखाती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता। उनका चयन पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है और आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।