बालोद में 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना

बालोद जिले में मछलियों के प्रजनन और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त तक नदी, नालों, जलाशयों और प्राकृतिक जल स्रोतों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है। मत्स्य पालन विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 25 हजार रुपये तक जुर्माने की चेतावनी दी है।

Jul 9, 2026 - 15:10
Jul 9, 2026 - 15:13
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बालोद में 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद जिले में मछलियों के प्रजनन और संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। मत्स्य पालन विभाग ने आम नागरिकों, मछुआरों और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों से इस अवधि के दौरान नियमों का पालन करने तथा जल संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।

मत्स्य पालन विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्योद्योग अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत प्रत्येक वर्ष 16 जून से 15 अगस्त तक क्लोज सीजन घोषित किया जाता है। इस अवधि में जिले के सभी नदी-नालों, जलाशयों तथा अधिकांश प्राकृतिक जल स्रोतों में मछली पकड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। इसका उद्देश्य प्रजनन काल के दौरान मछलियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उनकी संख्या में वृद्धि सुनिश्चित करना है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल प्राकृतिक जल स्रोतों पर लागू होगा। ऐसे छोटे तालाब जिनका किसी नदी या नाले से संपर्क नहीं है, वहां यह नियम लागू नहीं होगा। इसके अलावा जलाशयों में संचालित केज कल्चर (पिंजरा पद्धति से मत्स्य पालन) पर भी प्रतिबंध नहीं रहेगा, जिससे मत्स्य पालन गतिविधियां प्रभावित न हों।

सहायक संचालक, मत्स्य पालन विभाग ने बताया कि प्रतिबंध अवधि के दौरान यदि कोई व्यक्ति नदी, नाले या जलाशय में मछली पकड़ते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम-2025 के तहत ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

मत्स्य विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा ऋतु मछलियों के प्रजनन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। यदि इस दौरान बड़े पैमाने पर मत्स्याखेट किया जाए तो मछलियों की संख्या में लगातार कमी आ सकती है, जिसका असर भविष्य में मत्स्य उत्पादन और जल पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ता है। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि में मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगाया जाता है।

मत्स्य पालन विभाग ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे प्रतिबंध का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन करें और मछलियों के संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। विभाग ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता का संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा नियमों का पालन कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए मत्स्य संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।