पिता की स्मृति में बुजुर्गों की सेवा, 'अध्यात्म पथ' परिवार ने फील परमार्थम आश्रम में कराया भोजन वितरण

भिलाई में अध्यात्म पथ परिवार की पहल पर डॉ. अल्पना त्रिपाठी ने अपने पिता रामायण तिवारी की स्मृति में फील परमार्थम आश्रम में निराश्रित बुजुर्गों के लिए भोजन सेवा का आयोजन किया। सेवा कार्य में शामिल सदस्यों ने बुजुर्गों के बीच समय बिताकर मानवता और संवेदनशीलता का संदेश दिया।

Jul 27, 2026 - 16:58
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पिता की स्मृति में बुजुर्गों की सेवा, 'अध्यात्म पथ' परिवार ने फील परमार्थम आश्रम में कराया भोजन वितरण

UNITED NEWS OF ASIA. सेवा और संवेदनशीलता का सबसे सुंदर स्वरूप तब दिखाई देता है, जब किसी अपने की स्मृति को समाज की भलाई से जोड़ा जाए। इसी भावना को साकार करते हुए अध्यात्म पथ परिवार की सदस्य डॉ. अल्पना त्रिपाठी ने अपने पिता रामायण तिवारी की स्मृति में भिलाई स्थित फील परमार्थम आश्रम में निराश्रित बुजुर्गों एवं आश्रितजनों के लिए भोजन सेवा का आयोजन कराया। इस सेवा कार्य ने यह संदेश दिया कि पूर्वजों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल औपचारिक कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा और सम्मान से दी जा सकती है।

इस अवसर पर आचार्य डॉ. अजय आर्य, प्रीति साहू, रिचा श्रीवास्तव, हेमा सक्सेना और नमित क्षत्रिय ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने अपने हाथों से आश्रम में रह रहे बुजुर्गों को भोजन परोसा, उनसे आत्मीय संवाद किया और उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान बुजुर्गों के चेहरों पर दिखाई दी संतुष्टि और मुस्कान ने पूरे वातावरण को भावुक बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके सेवा कार्यों से होती है। यदि अपने पूर्वजों की स्मृति में किसी भूखे को भोजन, किसी असहाय को सहारा और किसी बुजुर्ग को सम्मान दिया जाए, तो वही सबसे श्रेष्ठ श्रद्धांजलि होती है। उन्होंने कहा कि सेवा केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष और ईश्वर की सच्ची आराधना का माध्यम भी है। समाज में करुणा, संवेदना और सहयोग की भावना का विस्तार ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

डॉ. अल्पना त्रिपाठी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अपने पिता की स्मृति में इस सेवा कार्य को करने का अवसर उनके लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा। बुजुर्गों के बीच बैठकर उन्हें भोजन कराना और उनका स्नेह व आशीर्वाद प्राप्त करना जीवन के सबसे अनमोल अनुभवों में शामिल हो गया। उन्होंने कहा कि फील परमार्थम आश्रम द्वारा निराश्रित बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों के लिए किया जा रहा कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

हेमा सक्सेना ने कहा कि सेवा केवल सहयोग देना नहीं, बल्कि किसी के जीवन में अपनापन और सम्मान का भाव पहुंचाना है। वहीं नमित क्षत्रिय ने कहा कि बुजुर्गों का आशीर्वाद और उनके चेहरे की मुस्कान ही इस सेवा कार्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने युवाओं से भी समय निकालकर ऐसे सामाजिक कार्यों में भागीदारी करने की अपील की।

फील परमार्थम आश्रम के संचालक अमित राज ने बताया कि संस्था निरंतर निराश्रित बुजुर्गों और मानसिक रूप से कमजोर आश्रितजनों की सेवा में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, माता-पिता की पुण्यतिथि, स्मृति दिवस या अन्य पारिवारिक अवसरों पर आश्रम में सेवा कार्य का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ सकता है। संस्था में चाय सेवा, दूध सेवा, नाश्ता सेवा, भोजन सेवा तथा औषधि सेवा जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से समाज के लोग सहयोग कर सकते हैं।

अध्यात्म पथ परिवार ने कार्यक्रम के अंत में सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने पारिवारिक और सामाजिक अवसरों को केवल उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें सेवा, करुणा और मानवता का माध्यम बनाएं। जरूरतमंदों की सहायता, बुजुर्गों का सम्मान और समाज के प्रति संवेदनशीलता ही सच्चे जीवन मूल्यों की पहचान है। इस प्रकार के सेवा कार्य न केवल जरूरतमंदों के जीवन में आशा का संचार करते हैं, बल्कि समाज में प्रेम, अपनत्व और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत बनाते हैं।