छोटेडोंगर में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस, अमर शहीदों को नमन कर निकली भव्य रैली

नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर में 84 परगना सर्व आदिवासी समाज ने विश्व आदिवासी दिवस पर भव्य आयोजन किया। अमर शहीदों को नमन और ध्वजारोहण के बाद निकली रैली में सैकड़ों लोगों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लिया। पारंपरिक वेशभूषा, मांदर की थाप और गोंडी नृत्य ने आयोजन को आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया।

Aug 9, 2026 - 16:01
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छोटेडोंगर में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस, अमर शहीदों को नमन कर निकली भव्य रैली

UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 84 परगना सर्व आदिवासी समाज द्वारा भव्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत साप्ताहिक बाजार स्थल पर अमर शहीदों के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना और ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके बाद बड़ी संख्या में समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में रैली के रूप में मुख्य मार्गों पर निकले और जल, जंगल एवं जमीन की रक्षा का संकल्प लिया।

ध्वजारोहण के बाद निकली रैली में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। पुरुष पारंपरिक सफेद वेशभूषा के साथ मोरपंख और सींग से सजे मुकुट पहने मांदर की थाप पर थिरकते नजर आए। वहीं महिलाओं ने पारंपरिक परिधान में रैली में उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली छोटेडोंगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस साप्ताहिक बाजार स्थल पहुंची।

इसके बाद बाजार स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को मंच पर आमंत्रित कर तिलक एवं पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात आदिवासी युवक-युवतियों ने डांडा और गोंडी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। मांदर और ढोल की थाप पर कलाकारों की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को आकर्षित किया। आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों से प्रभावित होकर भाजपा जिलाध्यक्ष संध्या पवार, छोटेडोंगर उपसरपंच संतोष बैठारू सहित स्थानीय नागरिकों ने मंच पर पहुंचकर कलाकारों को नगद राशि देकर प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के दौरान समाज के वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, भाषा और परंपराएं उसकी पहचान हैं। प्रकृति संरक्षण आदिवासी जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वक्ताओं ने बदलते समय में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य तथा स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में बस्तर की लोक कला और हस्तशिल्प भी आकर्षण का केंद्र रहे। पूरे आयोजन के दौरान छोटेडोंगर का बाजार स्थल आदिवासी संस्कृति, परंपरा और गौरव के रंग में नजर आया।

विश्व आदिवासी दिवस के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र ने 9 अगस्त 1994 से प्रतिवर्ष विश्व आदिवासी दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर के आदिवासी समुदायों की संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। छोटेडोंगर में आयोजित कार्यक्रम ने आदिवासी समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रमुखता से सामने रखा।