धान की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए कृषि विभाग ने जारी की सामयिक सलाह

धमतरी जिले में लगातार बारिश और वातावरण में अधिक नमी को देखते हुए कृषि विभाग ने धान की फसल में संभावित कीट एवं रोग प्रकोप से बचाव के लिए किसानों को सामयिक सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों से प्रतिदिन खेत का निरीक्षण करने और प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है।

Sep 24, 2026 - 13:23
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धान की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए कृषि विभाग ने जारी की सामयिक सलाह

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l खरीफ वर्ष 2026 में जिले में करीब 1.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल ली गई है। वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में धान की फसल कंसे निकलने से लेकर बालियां आने की अवस्था में है। पिछले दिनों हुई लगातार बारिश और वातावरण में अधिक नमी के कारण धान की फसल में कीट एवं रोग प्रकोप की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए सामयिक सलाह जारी की है।

कृषि विभाग ने किसानों से प्रतिदिन खेत का भ्रमण कर फसल का बारीकी से निरीक्षण करने की अपील की है। यदि कीट अथवा रोग का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक दिखाई देता है, तो किसानों को कृषि विभाग के मैदानी अमले अथवा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर तत्काल नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

धान में तना छेदक प्रमुख कीटों में शामिल है। इसके प्रकोप से पौधे की बीच की कंसे सूख जाती हैं, जिसे डेड हार्ट कहा जाता है। वहीं बाली अवस्था में बालियां सफेद दिखाई देने लगती हैं। कृषि विभाग ने इसके नियंत्रण के लिए अनुशंसित मात्रा में कारटाप हाइड्रोक्लोराइड, क्लोरेंट्रानिलिप्रोल अथवा बाईफेनथ्रीन और कारटाप हाइड्रोक्लोराइड के उपयोग की सलाह दी है।

भूरा फुदका यानी बीपीएच पौधे के निचले हिस्से से रस चूसता है। इसके कारण पौधे सूखने लगते हैं और हॉपर बर्न की स्थिति बन सकती है। इसके नियंत्रण के लिए खेत से पानी निकालने तथा पौधों के कंसे वाले हिस्से में अनुशंसित मात्रा में इमिडाक्लोप्रिड, डाइनोटेफ्यूरॉन अथवा ट्राईफ्लूमैज़ोपाइरिम का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। पत्ता लपेटक या पत्ता मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए अनुशंसित मात्रा में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल अथवा कारटाप का उपयोग किया जा सकता है।

पेनिकल माइट भी धान की फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यह बाली निकलने से पहले दानों को नुकसान पहुंचाता है। इसके प्रकोप में बालियों पर भूरे-काले धब्बे, दानों का नहीं भरना, खोखलापन और बालियों का मुड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके नियंत्रण के लिए डायफेथुरोन 50 डब्ल्यूपी और प्रोपीकोनाजोल 25 ईसी के अनुशंसित मिश्रण का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

रोगों में ब्लास्ट की पहचान पत्तियों पर आंख के आकार के धब्बों तथा बाली के गले में काले धब्बों से की जा सकती है। इससे बाली टूटने की स्थिति बन सकती है। नियंत्रण के लिए ट्राईसाइक्लाजोल अथवा एजोक्सीस्ट्रोबिन और डाइफेनोकोनाजोल के अनुशंसित मिश्रण का छिड़काव किया जा सकता है।

जीवाणु पत्ता झुलसा रोग में पत्तियां किनारे से पीली होकर सूखने लगती हैं। कृषि विभाग ने इसके नियंत्रण के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट टेट्रासाइक्लिन और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की अनुशंसित मात्रा का छिड़काव करने तथा नाइट्रोजन उर्वरक के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी है।

विभाग ने किसानों को कीटनाशक एवं फूंदनाशक का छिड़काव सुबह या शाम के समय करने की सलाह दी है। दवाओं की अनुशंसित मात्रा का ही उपयोग करने और डिब्बे पर दिए निर्देशों व सुरक्षा सावधानियों का पालन करने कहा गया है। किसी भी दवा का प्रयोग कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही करने की अपील की गई है।

किसान अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क कर सकते हैं।