यूसीसी से आदिवासियों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: दीपक बैज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने की संभावित कवायद पर चिंता जताते हुए आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि UCC लागू होने की स्थिति में पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची, आदिवासी भूमि अधिकार और संरक्षित जनजातियों के विशेष अधिकार यथावत रहेंगे या नहीं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने यूसीसी लागू किए जाने की संभावित कवायद पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और हितों का किसी भी स्थिति में हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से स्पष्ट घोषणा करने की मांग की है कि यूसीसी के दायरे से आदिवासी समाज को बाहर रखा जाएगा।
दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी निवास करती है और संविधान के तहत आदिवासी समाज को विशेष संरक्षण प्राप्त है। प्रदेश में पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में विशेष अधिकार और प्रावधान लागू हैं। ऐसे में यूसीसी लागू किए जाने से इन व्यवस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा, सरकार को इसकी स्पष्ट जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यूसीसी लागू होने के बाद क्या पेसा कानून का अस्तित्व और उसके अधिकार यथावत रहेंगे। पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाली पंचायतों के अधिकारों में किसी तरह का बदलाव तो नहीं किया जाएगा। इसके अलावा बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया और पांडा जैसी संरक्षित जनजातियों को संविधान से मिले विशेष अधिकारों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाएगी, सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आदिवासियों की जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि भू-राजस्व संबंधी नियमों में आदिवासियों के जमीन के मालिकाना हक और सामुदायिक अधिकारों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों में भूमि और संसाधनों से जुड़े अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि यूसीसी के माध्यम से भाजपा सरकार आदिवासी समाज के हितों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि आदिवासियों की जमीनों और संसाधनों पर उद्योगों की नजर है। हालांकि, ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस बयान में उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को संविधान के तहत मिले विशेष अधिकारों में किसी भी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि यूसीसी को लेकर आदिवासी समाज की आशंकाओं को दूर किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची, भूमि अधिकार तथा संरक्षित जनजातियों के संवैधानिक संरक्षण पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कांग्रेस का कहना है कि किसी भी नए कानून या व्यवस्था को लागू करने से पहले आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और विशेष प्रावधानों की पूरी तरह रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। पार्टी ने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट नीति और सार्वजनिक जवाब देने की मांग की है।