CBSE टेंडर का विश्लेषण करने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत ने लॉन्च किया सरकारी टेंडर ट्रैकिंग पोर्टल

कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (CPP) पोर्टल के करीब 1.66 करोड़ सरकारी खरीद रिकॉर्ड का सार्वजनिक डेटाबेस तैयार कर नया पोर्टल लॉन्च किया है। उनका उद्देश्य सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और नागरिकों, पत्रकारों तथा शोधकर्ताओं के लिए सरकारी खर्च का विश्लेषण आसान करना है।

Jun 27, 2026 - 15:32
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CBSE टेंडर का विश्लेषण करने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत ने लॉन्च किया सरकारी टेंडर ट्रैकिंग पोर्टल

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली l 27 जून 2026। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के डिजिटल मूल्यांकन टेंडर का विश्लेषण कर चर्चा में आए कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक बार फिर नई पहल से सुर्खियां बटोरी हैं। इस बार उन्होंने भारत सरकार के केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (CPP) पोर्टल से जुटाए गए लगभग 1.66 करोड़ सरकारी खरीद रिकॉर्ड का सार्वजनिक डेटाबेस तैयार कर एक नया पोर्टल लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना और आम नागरिकों के लिए सरकारी खर्च से जुड़ी जानकारी तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।

सार्थक सिद्धांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस परियोजना की जानकारी साझा करते हुए कहा कि पारदर्शिता सभी नागरिकों के लिए सहज रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले दो सप्ताह के दौरान केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल से करोड़ों खरीद रिकॉर्ड एकत्र कर उन्हें व्यवस्थित रूप से सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं से इस डेटाबेस का उपयोग कर स्वतंत्र रूप से सरकारी खरीद संबंधी रिकॉर्ड का अध्ययन और विश्लेषण करने की अपील भी की है।

सार्थक के अनुसार यह पोर्टल केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों की खरीद संबंधी जानकारी भी शामिल की गई है। उनका कहना है कि इस डेटाबेस के माध्यम से सरकारी खर्च से जुड़े रिकॉर्ड को खोजने, समझने और उनका विश्लेषण करना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा। उनका मानना है कि इससे सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ेगी और सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी।

इससे पहले सार्थक सिद्धांत उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब उन्होंने सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और उससे जुड़े टेंडर दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण किया था। उनके निष्कर्षों पर संसद तक चर्चा हुई और उन्हें शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के समक्ष अपने विचार रखने का अवसर भी मिला था।

सार्थक ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन पर भी विस्तृत अध्ययन प्रकाशित किया था। उन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी में अंक संबंधी अंतर देखने के बाद जांच शुरू की थी। बाद में कई छात्रों द्वारा डिजिटल मूल्यांकन की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जाने के बीच उन्होंने सीबीएसई के विभिन्न टेंडर दस्तावेजों का विश्लेषण किया। उनके अध्ययन में प्रदर्शन मानकों और प्रमाणन संबंधी कुछ बदलावों पर भी सवाल उठाए गए थे।

अब सरकारी खरीद रिकॉर्ड का यह सार्वजनिक डेटाबेस लॉन्च कर सार्थक सिद्धांत ने एक बार फिर पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के डेटा का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग किया जाए तो शोध, खोजी पत्रकारिता और सार्वजनिक नीतियों के विश्लेषण में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।