सरायपाली में बिना सूचना अनुपस्थित 6 शिक्षकों पर कार्रवाई, जुलाई का वेतन रोका
महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड में बिना पूर्व सूचना लगातार अनुपस्थित रहने वाले छह शिक्षकों के खिलाफ विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जुलाई माह का वेतन रोक दिया है। शिक्षकों को तीन दिन के भीतर उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड में बिना पूर्व सूचना लगातार स्कूल से अनुपस्थित रहने वाले छह शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सरायपाली द्वारा जारी आदेश में संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जुलाई माह का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की पढ़ाई से किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सरायपाली द्वारा 29 जुलाई 2026 को जारी नोटिस के अनुसार विद्यालयों के उपस्थिति रजिस्टर की जांच में छह शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना अथवा सक्षम अधिकारी की अनुमति के लगातार अनुपस्थित पाए गए। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत मानते हुए गंभीर अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति लापरवाही की श्रेणी में रखा है।
जिन शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है, उनमें सुरेन्द्र कुमार सिदार, प्रधान पाठक, शासकीय प्राथमिक शाला छिबर्रा; वेदकुमार भोई, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला पोड़ापाली; राहुल बेपारी, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला मुण्डपहार; विकास पटेल, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला खैरेझिटकी; रिजवाना परवीन हुसैन खान, प्रधान पाठक, शासकीय उच्च प्राथमिक शाला पण्डरीपानी तथा नुरपाल भोई, प्रधान पाठक, शासकीय प्राथमिक शाला अमलडीह शामिल हैं।
नोटिस में सभी शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि आदेश प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सरायपाली में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। यदि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित शिक्षक की होगी।
विभाग ने यह भी आदेश दिया है कि संबंधित शिक्षकों का जुलाई माह का वेतन तत्काल प्रभाव से रोका जाए। साथ ही अगले आदेश तक वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा। विभाग का कहना है कि जब तक मामले का निराकरण नहीं हो जाता और सक्षम अधिकारी द्वारा निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वेतन जारी नहीं किया जाएगा।
इस संबंध में जारी आदेश की प्रतियां अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद, संबंधित संकुल समन्वयकों तथा संबंधित विद्यालयों को भी भेजी गई हैं, ताकि आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित किया जा सके।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विद्यालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रत्येक शिक्षक की मूल जिम्मेदारी है। यदि कोई शिक्षक बिना अवकाश आवेदन या पूर्व अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहता है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान होता है।
विभाग का मानना है कि सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण किया जाता है और उपस्थिति रजिस्टर की जांच की जाती है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाती है।
इस कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षकों में भी चर्चा का माहौल है। शिक्षा विभाग द्वारा लगातार अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाए जाने से स्पष्ट संकेत मिला है कि कार्य में लापरवाही करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग ने दोहराया है कि विद्यार्थियों की शिक्षा और विद्यालयों में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचें, नियमित रूप से अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करें और यदि किसी कारणवश अवकाश लेना आवश्यक हो तो नियमानुसार पूर्व अनुमति प्राप्त करें। विभाग का कहना है कि बिना सूचना अनुपस्थित रहने की प्रवृत्ति को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरायपाली विकासखंड में की गई इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने नहीं दी जाएगी और कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध भविष्य में भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।