सारंगपुरकला में शुरू हुआ फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, ग्रामीणों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की बड़ी सौगात

कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सारंगपुरकला में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) का निर्माण पूरा होने के बाद संचालन शुरू हो गया है। इससे सेप्टिक टैंक के अपशिष्ट का वैज्ञानिक उपचार संभव होगा। ग्रामीणों को कम खर्च में सुविधा मिलने के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को भी मजबूती मिलेगी।

Jul 27, 2026 - 17:21
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सारंगपुरकला में शुरू हुआ फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, ग्रामीणों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की बड़ी सौगात

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। कबीरधाम जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत स्वच्छता संबंधी आधारभूत सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड बोड़ला की ग्राम पंचायत सारंगपुरकला में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) का निर्माण पूरा कर इसका संचालन शुरू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था से अब ग्रामीणों को सेप्टिक टैंक के अपशिष्ट के सुरक्षित, वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण की सुविधा उपलब्ध हो गई है।

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में स्थापित यह प्लांट ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को नई दिशा देगा। अब तक गांवों में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट के खुले में फैलने से गंदगी, दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती थी। कई बार लोगों को टैंक खाली कराने के लिए निजी एजेंसियों या शहरी क्षेत्रों की सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की अधिक खपत होती थी। एफएसटीपी शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का उद्देश्य केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण सैनिटेशन प्रणाली को सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाना भी है। फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और जनस्वास्थ्य के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि प्लांट में सेप्टिक टैंक से निकाले गए अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा। उपचार के बाद प्राप्त सामग्री का उपयोग जैविक खाद और अन्य उपयोगी कार्यों में किया जा सकेगा। इससे वर्मी कम्पोस्ट, गोबर गैस संयंत्र तथा अन्य जैविक संसाधनों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल अपशिष्ट प्रबंधन को टिकाऊ और उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जिला समन्वयक संजय सोनी ने बताया कि इस सुविधा का आर्थिक लाभ भी ग्रामीणों को मिलेगा। पहले सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए निजी वाहनों या नगर क्षेत्रों की सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे अधिक खर्च आता था। अब पंचायत स्तर पर ही यह सुविधा उपलब्ध होने से पहले की तुलना में आधे से भी कम खर्च में टैंक की सफाई और अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण कराया जा सकेगा।

ग्राम पंचायत सारंगपुरकला के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए जिला प्रशासन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि एफएसटीपी के संचालन से गांव में स्वच्छता व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी, गंदगी और दुर्गंध से राहत मिलेगी तथा संक्रामक बीमारियों की आशंका भी कम होगी। साथ ही गांव का वातावरण अधिक स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बनेगा।

प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों से अपील की है कि वे एफएसटीपी सहित स्वच्छता से जुड़ी सभी परिसंपत्तियों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करें और ग्रामीणों को इनके उपयोग एवं लाभों के प्रति जागरूक करें। सामुदायिक सहभागिता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर गांवों का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकेगा।

सारंगपुरकला में शुरू हुआ यह फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट ग्रामीण स्वच्छता प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का एक प्रभावी मॉडल भी स्थापित होगा।