समय पर उपचार से सर्पदंश पीड़ित 4 वर्षीय बालक को मिला नया जीवन, जिला चिकित्सालय कबीरधाम में सफल इलाज

कबीरधाम जिले के ग्राम कुकरापानी निवासी 4 वर्षीय बालक का सर्पदंश के बाद जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में सफल उपचार किया गया। आठ दिनों तक चले इलाज के बाद बालक पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गया। स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक से बचकर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है।

Jul 27, 2026 - 17:24
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समय पर उपचार से सर्पदंश पीड़ित 4 वर्षीय बालक को मिला नया जीवन, जिला चिकित्सालय कबीरधाम में सफल इलाज

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। कबीरधाम जिला चिकित्सालय में समय पर मिले विशेषज्ञ उपचार और चिकित्सकों की सतर्कता से सर्पदंश से पीड़ित चार वर्षीय बालक को नया जीवन मिला। ग्राम कुकरापानी, विकासखंड बोड़ला निवासी महेश बैगा को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था, लेकिन लगातार आठ दिनों तक चले उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गया।

जानकारी के अनुसार 20 जुलाई 2026 को महेश बैगा को सर्पदंश होने के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तरेगांव में प्राथमिक उपचार दिया गया। बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल जिला चिकित्सालय कवर्धा रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने के समय उसके पूरे चेहरे पर अत्यधिक सूजन थी तथा आंखों में रक्तस्राव के लक्षण दिखाई दे रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए उपचार शुरू कर दिया।

मामले की जानकारी मिलते ही उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बालक के बेहतर एवं त्वरित उपचार के निर्देश दिए। इसके बाद जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ इलाज शुरू किया। बालक को एंटी स्नेक वेनम, आवश्यक दवाइयां, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और लगातार चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराई गई।

लगातार आठ दिनों तक चले उपचार के दौरान बालक के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होता गया। चिकित्सकों ने उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी और आवश्यकतानुसार उपचार में बदलाव किया। उपचार सफल रहने के बाद 28 जुलाई 2026 को महेश बैगा को पूर्णतः स्वस्थ और स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इस सफल उपचार में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा, फैमिली मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. हर्षित टुवानी, डॉ. आशुतोष कुमार तथा जिला चिकित्सालय के नर्सिंग एवं सहयोगी स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चिकित्सकों की टीम ने समय पर सही उपचार उपलब्ध कराकर बालक का जीवन सुरक्षित किया।

फैमिली मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. हर्षित टुवानी ने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं। मरीज को शांत रखें, प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं और तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या शासकीय अस्पताल पहुंचाएं। समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा ने बताया कि बच्चों में सर्पदंश का प्रभाव तेजी से गंभीर हो सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार के विलंब से बचते हुए तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सा लेना आवश्यक है। समय पर एंटी स्नेक वेनम और उचित उपचार मिलने से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है तथा मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।

सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. केशव ध्रुव ने बताया कि जिला चिकित्सालय कबीरधाम में सर्पदंश के उपचार के लिए एंटी स्नेक वेनम, आवश्यक दवाइयां और प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। उन्होंने वर्षा ऋतु में खेतों, जंगलों और घास वाले क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि सर्पदंश एक चिकित्सकीय आपातकालीन स्थिति है। ऐसी स्थिति में घबराने या झाड़-फूंक का सहारा लेने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचकर वैज्ञानिक उपचार कराना चाहिए। समय पर चिकित्सा मिलने से अधिकांश मरीजों का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है और वे पूर्णतः स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकते हैं।