पाठ्यपुस्तक वितरण में देरी पर निजी स्कूल संचालकों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कोरबा में छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय प्रबंधक संघ के बैनर तले निजी स्कूल संचालकों ने पाठ्यपुस्तकों के वितरण में हो रही देरी के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने पाठ्यपुस्तक निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और निजी विद्यालयों को समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की।

Jun 26, 2026 - 11:08
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पाठ्यपुस्तक वितरण में देरी पर निजी स्कूल संचालकों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA. कोरबा l कोरबा जिले में नए शैक्षणिक सत्र के बीच पाठ्यपुस्तकों के वितरण में हो रही देरी को लेकर निजी विद्यालय संचालकों ने विरोध प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय प्रबंधक संघ, जिला कोरबा के बैनर तले बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालक कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पाठ्यपुस्तक वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग की।

संघ का कहना है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 16 जून 2026 से हो चुकी है, लेकिन अब तक अधिकांश विद्यार्थियों को आवश्यक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं। इससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षण व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

ज्ञापन में बताया गया कि यह समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में भी पाठ्यपुस्तक निगम की लापरवाही के कारण कई विषयों की पुस्तकें पूरे सत्र के दौरान उपलब्ध नहीं हो सकी थीं। इसके बावजूद इस वर्ष भी वितरण व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, जिससे विद्यार्थी और अभिभावक दोनों परेशान हैं।

संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार निजी विद्यालयों को 21 जुलाई तक पाठ्यपुस्तकों का वितरण किए जाने की योजना बनाई गई है। उनका कहना है कि सत्र शुरू होने के एक महीने बाद तक पुस्तकें मिलने से विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण शैक्षणिक समय नष्ट होगा और पाठ्यक्रम समय पर पूरा करना कठिन हो जाएगा।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आगामी बोर्ड परीक्षाएं फरवरी माह में प्रस्तावित हैं। ऐसे में यदि विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होती हैं तो उनकी पढ़ाई, पुनरावृत्ति और परीक्षा की तैयारी पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इससे परीक्षा परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं।

निजी विद्यालय संचालकों ने मांग की है कि पाठ्यपुस्तक वितरण में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही पूर्व वर्षों की तरह निजी विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर समयबद्ध तरीके से पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की व्यवस्था फिर से लागू की जाए, ताकि सरकारी और निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव न हो।

संघ ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में समय पर पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि शुरुआत से ही विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं मिलेंगी तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उद्देश्य प्रभावित होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।

प्रदर्शन के दौरान निजी विद्यालय संचालकों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर पाठ्यपुस्तकों का वितरण समय पर सुनिश्चित करेगा, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।