कोरबा में विधायक अनुज शर्मा ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय

कोरबा प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में धरसीवाँ विधायक अनुज शर्मा ने वर्ष 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का दमन किया गया। उन्होंने युवाओं को आपातकाल के इतिहास से अवगत कराने की आवश्यकता पर जोर देते हुए लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दोहराया।

Jun 25, 2026 - 17:08
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कोरबा में विधायक अनुज शर्मा ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय

UNITED NEWS OF ASIA. कोरबा l कोरबा के प्रेस क्लब तिलक भवन में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में धरसीवाँ विधायक अनुज शर्मा ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया। इस अवसर पर संविधान हत्या दिवस के विरोध में मौन पदयात्रा भी निकाली गई। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को आपातकाल की वास्तविक घटनाओं और उससे जुड़े इतिहास की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

अनुज शर्मा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध ठहराए जाने के बाद सत्ता बचाने के उद्देश्य से देश में आपातकाल लागू किया गया। इसके बाद विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया गया। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई और जॉर्ज फर्नांडिस सहित हजारों नेताओं को जेल भेजे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के लंबे संघर्ष और बलिदान से प्राप्त लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक रात में कमजोर कर दिया गया। संसद, न्यायपालिका और राष्ट्रपति जैसी संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका सीमित कर दी गई तथा संविधान में व्यापक संशोधन किए गए। उनके अनुसार सत्ता के अहंकार में नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचल दिया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए।

प्रेस वार्ता में अनुज शर्मा ने मीडिया की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान सबसे पहला हमला प्रेस की स्वतंत्रता पर हुआ। अखबारों पर सेंसरशिप लागू की गई, कई समाचार पत्रों के कार्यालयों की बिजली काट दी गई और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि जब न्यायपालिका पर दबाव बनाया जाए, मीडिया की आवाज दबा दी जाए और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया जाए, तब लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही की स्थिति उत्पन्न होती है।

उन्होंने कहा कि भारत की जनता ने लोकतंत्र में विश्वास बनाए रखा और अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना हुई। आज, आपातकाल के 51 वर्ष पूरे होने पर उस दौर को केवल याद करने का नहीं बल्कि उससे सीख लेने का समय है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक अधिकारों, संविधान की गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहना होगा।

प्रेस क्लब के मंच से अनुज शर्मा ने देश और प्रदेश के नागरिकों से लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को यह बताया जाना चाहिए कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए देश ने कितने संघर्ष और बलिदान देखे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जागरूक नागरिकों की भागीदारी से लोकतांत्रिक मूल्यों को हमेशा सुरक्षित रखा जा सकेगा और भविष्य में किसी भी प्रकार की तानाशाही मानसिकता को देश में स्थान नहीं मिलेगा।