आंजनेय विश्वविद्यालय में ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम का शुभारंभ, बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार होंगे प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स

रायपुर के आंजनेय विश्वविद्यालय में बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण को लेकर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के नए बैच ‘रक्षक’ का शुभारंभ किया गया। यह पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सहयोग से संचालित होगा। इसमें विद्यार्थियों को बाल अधिकार कानूनों के साथ बाल संरक्षण व्यवस्था की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थियों के लिए बाल संरक्षण इकाइयों, गैर-सरकारी संगठनों और विभिन्न सरकारी संस्थानों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

Aug 10, 2026 - 16:46
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आंजनेय विश्वविद्यालय में ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम का शुभारंभ, बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार होंगे प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण को लेकर आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (PGDPCR) के नए बैच ‘रक्षक’ का शुभारंभ किया गया। यह पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। राज्य में बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों और आयोग के बीच साझा शैक्षणिक पहल के रूप में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने कहा कि ‘रक्षक’ केवल एक पाठ्यक्रम का नाम नहीं है, बल्कि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी है। उन्होंने कहा कि आज बच्चों को हिंसा, शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह, साइबर जोखिम और अन्य चुनौतियों से बचाने के लिए प्रशिक्षित एवं संवेदनशील मानव संसाधन की आवश्यकता है। ऐसे में यह पाठ्यक्रम युवाओं को ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास है।

विश्वविद्यालय के चांसलर अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों का सैद्धांतिक अध्ययन कराना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को बाल संरक्षण व्यवस्था की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। पाठ्यक्रम में बाल अधिकारों से संबंधित कानूनों, सरकारी योजनाओं, संबंधित संस्थाओं की कार्यप्रणाली, विभागीय प्रक्रियाओं और बाल संरक्षण इकाइयों के कार्यों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर रहेगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ टी रामाराव ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल कानून और संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के पाठ्यक्रम युवाओं को बाल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

लॉ संकाय के डीन एवं पाठ्यक्रम संचालन के अध्यक्ष डॉ केसी दलाई ने पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक न्याय, मौलिक अधिकार और मानवाधिकारों के अंतर्गत बच्चों के हितों की रक्षा के लिए अनेक संवैधानिक प्रावधान और कानून मौजूद हैं। हालांकि बाल अधिकार संरक्षण ऐसा क्षेत्र है, जिसमें केवल कानून की जानकारी पर्याप्त नहीं है। बच्चों की परिस्थितियों, उनकी जरूरतों, संरक्षण तंत्र और जमीनी स्तर पर होने वाली कार्रवाई की समझ भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक पहलुओं को शामिल किया गया है।

पाठ्यक्रम पूरा करने पर रोजगार के अवसर

‘रक्षक’ पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को बाल अधिकारों की समझ के साथ रोजगार के नए अवसरों से भी जोड़ेगा। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थी बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय से जुड़े संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, बाल देखभाल संस्थानों, सामाजिक विकास परियोजनाओं तथा विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों में कार्य के अवसर तलाश सकेंगे।

कार्यक्रम का संचालन लॉ विभाग की सहायक प्राध्यापक पलक ओटवानी ने किया, जबकि आभार एजुकेशन विभाग की सहायक प्राध्यापक कुमारी विद्याभूषण ने व्यक्त किया। शुभारंभ समारोह में महानिदेशक डॉ बीसी जैन, डायरेक्टर डॉ जयेंद्र नारंग, कुलसचिव डॉ रुपाली चौधरी, डायरेक्टर एकेडमिक डॉ संध्या वर्मा सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।