मनेंद्रगढ़ में नजूल भूमि को कृषि बताकर अवैध प्लॉटिंग का खेल, सरकारी तालाब पर कब्जे की कोशिश

मनेंद्रगढ़ जिले में नजूल भूमि को कृषि बताकर अवैध प्लॉटिंग करने और सरकारी तालाब को सुखाकर कब्जे की साजिश का मामला सामने आया है। कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

Feb 6, 2026 - 20:32
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मनेंद्रगढ़ में नजूल भूमि को कृषि बताकर अवैध प्लॉटिंग का खेल, सरकारी तालाब पर कब्जे की कोशिश

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ़)। जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) में भूमि से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। कलेक्टर जनदर्शन में सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि शहर के कीमती नजूल भूखंडों को कागजी हेरफेर के जरिए कृषि भूमि बताकर अवैध रूप से बेचा जा रहा है। साथ ही सार्वजनिक तालाब को समाप्त कर उस पर भी कब्जे की साजिश रची जा रही है।

शिकायत के अनुसार नगर मनेंद्रगढ़ स्थित खसरा नंबर 165, जिसका रकबा 2.85 एकड़ है, तथा खसरा नंबर 167, जिसका रकबा 55 डिसमिल है, वर्ष 1944-45 के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थे। बाद में नगरीय क्षेत्र में शामिल होने के कारण इन जमीनों को नजूल भूमि घोषित कर दिया गया था। इसके बावजूद वर्तमान ऑनलाइन नक्शा, खसरा एवं बी-1 रिकॉर्ड में ये भूमि अब भी कृषि मद में दर्ज दिखाई जा रही है।

आरोप है कि इसी तकनीकी त्रुटि का फायदा उठाकर भू-माफिया नजूल भूमि की वास्तविक स्थिति छिपाकर इसे कृषि भूमि के रूप में छोटे-छोटे हिस्सों में काटकर अवैध प्लॉटिंग कर बेच रहे हैं। जानकारी के अनुसार खसरा नंबर 165 में अब तक 19 उपखंड तथा खसरा नंबर 167 में 11 उपखंड बनाए जा चुके हैं, जो नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है।

शिकायत में यह भी खुलासा किया गया है कि खसरा नंबर 165 के लगभग 60 से 70 डिसमिल क्षेत्र में एक सार्वजनिक तालाब स्थित है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 251 के तहत यह तालाब राज्य शासन की संपत्ति माना जाता है। आरोप लगाया गया है कि भू-माफिया इस तालाब को धीरे-धीरे सुखाकर उस भूमि पर भी अवैध प्लॉटिंग करने की तैयारी में हैं।

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए बटांकन किए गए सभी नंबरों की जांच कर उन्हें पुनः नजूल मद में दर्ज करने, तालाब क्षेत्र की विधिवत पैमाइश कर उसे शासकीय घोषित करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने भी सरकारी भूमि और सार्वजनिक जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।