धमतरी में आदिवासी छात्राओं के लिए चार नए छात्रावास स्वीकृत, शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान

मतरी जिले में दूरस्थ और आदिवासी अंचलों की छात्राओं के लिए चार नए छात्रावासों का निर्माण स्वीकृत किया गया है। इन छात्रावासों से बालिकाओं को सुरक्षित आवास एवं शिक्षा में निरंतरता का अवसर मिलेगा। कुल 7.45 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

Dec 31, 2025 - 12:42
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धमतरी में आदिवासी छात्राओं के लिए चार नए छात्रावास स्वीकृत, शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान

  UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी | धमतरी जिले में दूरस्थ और आदिवासी अंचलों की छात्राओं के लिए चार नए छात्रावासों के निर्माण को स्वीकृति मिल गई है। यह निर्णय भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, नई दिल्ली द्वारा संचालित PM JANMAN एवं DA-JGUA योजनाओं के तहत आयोजित PAB 2025-26 बैठक (16 जून 2025) में लिया गया। इस पहल से जिले में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा में निरंतरता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

नगरी विकासखंड में अध्ययनरत PVTGs (विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति) और अन्य अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए स्वीकृत चार छात्रावासों में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, कुकरैल में 50 सीटर छात्रावास DA-JGUA योजना के अंतर्गत और हायर सेकेंडरी स्कूल डोंगरडुला, बेलरबहारा एवं रिसगांव में तीन-तीन 50-50 सीटर छात्रावास PM JANMAN योजना के तहत शामिल हैं। कुल स्वीकृत राशि ₹744.59 लाख (लगभग 7.45 करोड़ रुपये) है।

इन छात्रावासों के निर्माण की जिम्मेदारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES), विकास आयुक्त कार्यालय, नया रायपुर को दी गई है। निर्माण पूर्ण होने पर छात्रावासों से आदिवासी अंचलों और दुर्गम वनांचल से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और अनुकूल आवासीय सुविधा उपलब्ध होगी। विशेष रूप से बालिकाओं को आवागमन की कठिनाइयों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से राहत मिलेगी, जिससे उनके विद्यालय छोड़ने की दर में कमी आएगी।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि यह पहल सामाजिक समावेशन और शैक्षिक समानता की दिशा में मील का पत्थर है। सुरक्षित आवास मिलने से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को निरंतर शिक्षा का अवसर मिलेगा और वे आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर सकेंगी। जिला प्रशासन परियोजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है।

इन छात्रावासों के निर्माण से न केवल शैक्षणिक निरंतरता बढ़ेगी, बल्कि आदिवासी समाज में शिक्षा के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होगा। यह पहल धमतरी जिले को समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाती है और शासन की दूरदर्शी नीतियों का सफल उदाहरण साबित होगी।