तातापानी साप्ताहिक बाजार में अवैध कब्जे का आरोप, रास्ता बाधित होने से ग्रामीण और व्यापारी परेशान
बलरामपुर जिले के तातापानी साप्ताहिक बाजार में सरकारी भूमि और मुख्य मार्ग पर कथित अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों और बाजार आने वाले लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि मुख्य रास्ता बाधित होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है और कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में कार्रवाई की मांग की है। इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिले के ऐतिहासिक तातापानी साप्ताहिक बाजार में कथित अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों और बाजार आने वाले लोगों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि बाजार की सरकारी भूमि और मुख्य मार्ग पर किए गए कथित अतिक्रमण के कारण आवागमन बाधित हो रहा है तथा खरीदारों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि तातापानी का साप्ताहिक बाजार क्षेत्र का प्रमुख बाजार है, जहां प्रत्येक मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। उनका आरोप है कि पिछले लगभग एक वर्ष से बाजार के मुख्य रास्ते पर कुछ लोगों द्वारा स्थायी निर्माण कर लिया गया है, जिससे वाहन और पैदल आवागमन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि कोई व्यक्ति उस मार्ग से वाहन निकालने का प्रयास करता है तो कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वाहन निकालने को लेकर गाली-गलौज और मारपीट जैसी घटनाएं भी होती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बाजार की सरकारी भूमि पर कथित रूप से दुकानें बनाकर किराए पर दी जा रही हैं। उनका कहना है कि बाजार आने वाले लोगों से बाजार शुल्क भी लिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि दुकानों या तिरपाल को नुकसान होने पर उनसे जबरन राशि की मांग की जाती है। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस समस्या को लेकर वे पहले भी कई बार जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत एवं ज्ञापन सौंप चुके हैं। उनका कहना है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रशासन से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने एक बार फिर मीडिया के माध्यम से अपनी मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए तथा बाजार के मुख्य मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायतों की जांच किस स्तर पर पहुंची है। अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन मामले की जांच कर क्या निर्णय लेता है और यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो क्या नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।