यूसीसी पर कांग्रेस का हमला, दीपक बैज ने आदिवासी अधिकारों को लेकर सरकार से पूछे सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची और संरक्षित जनजातियों के अधिकारों को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

Jun 27, 2026 - 13:15
 0  2
यूसीसी पर कांग्रेस का हमला, दीपक बैज ने आदिवासी अधिकारों को लेकर सरकार से पूछे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार द्वारा यूसीसी के लिए समिति गठित किए जाने पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यदि यह कानून लागू किया गया तो राज्य के आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और विशेष संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

दीपक बैज ने जारी बयान में कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज को संविधान के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि राज्य की 32 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासी समुदाय से संबंधित है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पेसा कानून तथा पांचवीं अनुसूची जैसे विशेष संवैधानिक प्रावधान लागू हैं। उनका आरोप है कि यूसीसी लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम इन अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बस्तर में नक्सलवाद कम होने के बाद कुछ उद्योगपतियों की नजर आदिवासी क्षेत्रों की जमीनों पर है। उनके अनुसार यूसीसी लागू करने की कवायद आदिवासियों के हितों की बजाय उद्योगपतियों के हितों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा कानूनों के कारण आदिवासी जमीनों का हस्तांतरण आसान नहीं है, इसलिए नए रास्ते तलाशने की कोशिश की जा रही है।

दीपक बैज ने राज्य सरकार से कई सवाल भी पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि यदि यूसीसी लागू होता है तो क्या पेसा कानून का वर्तमान स्वरूप बरकरार रहेगा, क्या पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाली पंचायतों के अधिकारों में कोई बदलाव नहीं होगा, क्या बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया और पांडा जैसी संरक्षित जनजातियों को संविधान के तहत प्राप्त विशेष अधिकार सुरक्षित रहेंगे तथा क्या आदिवासियों के सामुदायिक भूमि अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य का मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी समाज से आता है, इसलिए सरकार को आदिवासी समुदाय की आशंकाओं का स्पष्ट उत्तर देना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि संविधान द्वारा आदिवासी समाज को दिए गए विशेष अधिकारों और संरक्षण में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यूसीसी के माध्यम से आदिवासियों के मौलिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान में प्रदत्त आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी और इस विषय पर सरकार से स्पष्ट नीति सार्वजनिक करने की मांग करती रहेगी।