खेत से सड़क निर्माण पर किसान की आपत्ति, मुआवजा नहीं मिलने का लगाया आरोप
दंतेवाड़ा जिले के ग्राम गमावाड़ा में सड़क निर्माण कार्य को लेकर विवाद सामने आया है। किसान रामलाल भास्कर ने आरोप लगाया है कि उनके खेत से बिना मुआवजा दिए सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिससे उनकी खेती प्रभावित हुई है। मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l जिले के ग्राम गमावाड़ा में सड़क निर्माण कार्य को लेकर विवाद की स्थिति सामने आई है। गांव के किसान रामलाल भास्कर ने आरोप लगाया है कि उनके खेत से बिना उचित प्रक्रिया और मुआवजा दिए सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि इस निर्माण कार्य के कारण उनकी खेती प्रभावित हुई है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान रामलाल भास्कर के अनुसार, गांव में लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से सड़क और पुलिया निर्माण का कार्य चल रहा है। उनका आरोप है कि सड़क उनके खेत से करीब 10 फीट चौड़ाई में निकाली जा रही है। उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्य के दौरान खेत में मुर्म डाले जाने से इस वर्ष वे खेती नहीं कर सके, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई है।
रामलाल भास्कर का कहना है कि सड़क निर्माण शुरू करने से पहले उन्हें न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही भूमि उपयोग के संबंध में किसी प्रकार की सहमति ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक उन्हें किसी भी प्रकार का मुआवजा या सहायता राशि नहीं मिली है। किसान का कहना है कि यदि उनकी भूमि का उपयोग सार्वजनिक निर्माण के लिए किया जा रहा है, तो उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने गांव के सरपंच से भी चर्चा की थी। उनके अनुसार, सरपंच ने उन्हें कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देकर अपनी शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। वहीं, इस मामले में सरपंच ने सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान देने से इनकार किया। स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत के दौरान भी अधिकांश लोगों ने खुलकर टिप्पणी करने से परहेज किया।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित निर्माण एजेंसी या ठेकेदार का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को सड़क निर्माण को लेकर आपत्ति है, तो वह कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन प्रस्तुत कर सकता है। उनका कहना है कि नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्रता के अनुसार मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक लिखित प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह मामला विकास कार्यों और किसानों के भूमि अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। यदि किसी निजी भूमि का उपयोग सार्वजनिक परियोजना के लिए किया जाता है, तो भूमि अधिग्रहण और मुआवजा संबंधी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक होता है।
फिलहाल मामले में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसान की भूमि का उपयोग नियमानुसार किया गया है, तो प्रशासन इसे स्पष्ट करे, और यदि भूमि का उपयोग बिना उचित प्रक्रिया के हुआ है, तो कानून के अनुसार किसान को उचित मुआवजा और राहत उपलब्ध कराई जाए।