वेदांता स्किल स्कूल से 13 हजार से अधिक युवाओं को मिला रोजगार का रास्ता, कौशल प्रशिक्षण से बढ़ी आत्मनिर्भरता

बालको द्वारा संचालित वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से कोरबा, सरगुजा और कवर्धा में अब तक 13 हजार से अधिक युवाओं को उद्योगोन्मुख कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

Jul 2, 2026 - 18:17
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वेदांता स्किल स्कूल से 13 हजार से अधिक युवाओं को मिला रोजगार का रास्ता, कौशल प्रशिक्षण से बढ़ी आत्मनिर्भरता

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l तेजी से बदलते औद्योगिक परिवेश में कुशल मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) लगातार महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। कंपनी द्वारा संचालित वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से ग्रामीण और विशेष रूप से जनजातीय समुदाय के युवाओं को उद्योगोन्मुख कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। अब तक कोरबा, सरगुजा और कवर्धा स्थित प्रशिक्षण केंद्रों से 13 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया जा चुका है।

वेदांता स्किल स्कूल में युवाओं को पूरी तरह निःशुल्क आवासीय व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित किए जाते हैं, जिससे प्रशिक्षुओं को उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सके।

इन प्रशिक्षण केंद्रों में वेल्डर, फिटर, हॉस्पिटैलिटी, सिलाई मशीन ऑपरेटर, सोलर पीवी तकनीशियन, मोबाइल रिपेयरिंग और इलेक्ट्रीशियन सहित सात प्रमुख ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को फॉक्सकॉन, वेलस्पन, क्रॉम्पटन ग्रीव्स, अडानी, वोल्वो आइशर, बारबेक्यू नेशन और टाटा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग जैसी कंपनियों में रोजगार के अवसर मिले हैं।

प्रशिक्षण प्राप्त लाभार्थियों की सफलता की कहानियां इस पहल की उपयोगिता को दर्शाती हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, बेंगलुरु में कार्यरत निशा यादव ने बताया कि तकनीकी प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास और उद्योगों से जुड़ाव ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। वहीं महाराष्ट्र के धुले स्थित एक होटल में फूड एंड बेवरेज विभाग में कार्यरत वंदना निराला ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान विकसित हुए संचार कौशल और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें अपने करियर में आगे बढ़ने में मदद की। छत्तीसगढ़ के सक्ती निवासी विनोद कुम्हार ने मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण लेकर स्वयं का व्यवसाय शुरू किया और आज सफल उद्यमी के रूप में कार्य कर रहे हैं।

तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ वेदांता स्किल स्कूल में युवाओं के समग्र व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैल्यू-एडेड मॉड्यूल, औद्योगिक भ्रमण, उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद, सुरक्षा प्रशिक्षण, कर्मचारी स्वयंसेवकों की मेंटरशिप और एलुमनाई इंटरैक्शन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों से युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यावसायिक दक्षता का विकास होता है।

बालको का मानना है कि कौशल विकास सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला है। कंपनी भविष्य में भी उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। वेदांता स्किल स्कूल की यह पहल न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान कर रही है।