बलरामपुर में सामुदायिक शौचालय बने भ्रष्टाचार की मिसाल, लाखों खर्च के बाद भी ग्रामीण परेशान

बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत तेतरडीह में लाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक शौचालय अधूरे और जर्जर हालत में पड़े हैं। ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।

Apr 4, 2026 - 15:35
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बलरामपुर में सामुदायिक शौचालय बने भ्रष्टाचार की मिसाल, लाखों खर्च के बाद भी ग्रामीण परेशान

 UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के विकासखंड रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत तेतरडीह में स्वच्छता के नाम पर भारी भ्रष्टाचार और लापरवाही का मामला सामने आया है। केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं तेतरडीह में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत तेतरडीह में ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। प्रत्येक शौचालय की लागत लगभग 3 लाख 23 हजार रुपये बताई जा रही है। इस हिसाब से दोनों निर्माण कार्यों पर कुल 6 लाख 46 हजार रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

पहला सामुदायिक शौचालय गांव के स्कूल के समीप बनाया गया था, जो आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण यह उपयोग के लायक नहीं है और धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है। वहीं दूसरा शौचालय फुटबॉल मैदान के पास बनाया गया, जो देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रहा है। दोनों ही शौचालयों की स्थिति यह दर्शाती है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन शौचालयों के लिए बनाए गए बोरवेल और समरसेबल पंप का उपयोग ग्रामीणों की सुविधा के बजाय निजी खेत की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। सार्वजनिक संसाधनों का इस तरह निजी उपयोग किया जाना पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

जब इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव मोहर साय मरवी से बात की गई, तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि शौचालय का दरवाजा किसी ने तोड़ दिया है, इसमें वे क्या कर सकते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने जल्द व्यवस्था सुधारने का आश्वासन जरूर दिया। दूसरी ओर, सरपंच से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव और सरपंच की मिलीभगत से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। उनका कहना है कि यदि समय पर निर्माण कार्य पूरा किया जाता और सही तरीके से रखरखाव होता, तो आज उन्हें खुले में शौच के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

इस पूरे मामले में जनपद पंचायत के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार होने के बावजूद अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इस तरह के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना मुश्किल हो जाएगा।

कुल मिलाकर, तेतरडीह में सामुदायिक शौचालयों की यह स्थिति न केवल सरकारी योजनाओं की विफलता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि निगरानी और जवाबदेही के अभाव में विकास कार्य किस तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं।