बालोद में सुशासन की मिसाल: कलेक्टर दिव्या मिश्रा के नेतृत्व में योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचीं
बालोद जिले में कलेक्टर दिव्या मिश्रा के नेतृत्व में प्रशासन ने सुशासन का मजबूत उदाहरण पेश किया है। विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पारदर्शी और संवेदनशील कार्यशैली अपनाई जा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील कुमार साहू , बालोद। छत्तीसगढ़ राज्य में सुशासन और जनकल्याण की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में बालोद जिला प्रशासन एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रही योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने में जिला प्रशासन सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस दिशा में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के कुशल नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।
कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने अपने प्रशासनिक दृष्टिकोण में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी है। वे नियमित रूप से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का दौरा करती हैं, जहां वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुनती हैं। खास बात यह है कि वे समस्याओं के समाधान के लिए मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देती हैं, जिससे त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
जिला प्रशासन द्वारा आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र हितग्राही योजना के लाभ से वंचित न रहे। पंचायत स्तर तक टीमों का गठन कर नियमित सर्वे और फीडबैक की व्यवस्था की गई है, जिससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।
प्रशासन ने केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि नवाचार और तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और जनसंचार कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ी है और वे स्वयं आगे आकर योजनाओं का लाभ लेने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कलेक्टर दिव्या मिश्रा की कार्यशैली सरल, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी है। उनके नेतृत्व में प्रशासन और जनता के बीच संवाद बेहतर हुआ है और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पहले योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता था, वहां अब तेजी से काम हो रहा है।
कलेक्टर मिश्रा के प्रयासों का असर यह है कि बालोद जिले में विकास कार्यों को नई गति मिली है। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन न केवल लोगों के जीवन स्तर को सुधार रहा है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बालोद जिले में लागू की जा रही व्यवस्थाएं अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती हैं। यहां अपनाई गई कार्यप्रणाली और योजनाओं के वितरण की पारदर्शी व्यवस्था राज्य के अन्य हिस्सों में भी लागू की जा सकती है।
कुल मिलाकर, बालोद में कलेक्टर दिव्या मिश्रा के नेतृत्व में सुशासन की एक नई मिसाल स्थापित हो रही है। यह स्पष्ट है कि “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प को जिले में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इससे न केवल योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच भरोसे और सहयोग का नया अध्याय भी लिखा जा रहा है।