सावन के दौरान दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िए भगवान भोरमदेव के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। कई शिवभक्त लंबी दूरी तय कर कांवड़ लेकर मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन व्यवस्था में किसी प्रकार की अव्यवस्था या श्रद्धालुओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर विकाश केशरी ने इसे गंभीर विषय बताया है।
केशरी ने कहा कि यदि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति वास्तविक है और आम शिवभक्तों तथा कांवड़ियों को बाहर इंतजार करवाकर किसी विशेष व्यक्ति के लिए दर्शन व्यवस्था में प्राथमिकता दी जा रही है, तो प्रशासन को इसकी जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सावन भगवान शिव और उनके भक्तों के लिए विशेष आस्था का पर्व है। इस दौरान मंदिर पहुंचने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और सुचारू दर्शन की व्यवस्था करना प्रशासन तथा मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी है। व्यवस्था के नाम पर किसी श्रद्धालु की आस्था और सम्मान को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि VIP व्यवस्था करनी है तो सावन के बाद की जा सकती है, लेकिन सावन के दौरान भगवान भोलेनाथ के भक्तों के बीच किसी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विकाश केशरी ने प्रशासन से सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और श्रद्धालुओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी या अन्य व्यक्ति द्वारा श्रद्धालुओं के साथ अभद्र व्यवहार की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भोरमदेव केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोगों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां पहुंचने वाला प्रत्येक श्रद्धालु सम्मान का अधिकारी है। मंदिर प्रबंधन को कांवड़ियों और आम श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं, सुचारू दर्शन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
केशरी ने कहा कि वे भगवान भोलेनाथ के भक्त हैं और शिवभक्तों की आस्था तथा सम्मान से जुड़े मुद्दे पर आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो शिवभक्तों के साथ मिलकर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के सम्मान और भोरमदेव की गरिमा से जुड़ा विषय है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं मंदिर प्रबंधन से सावन के शेष दिनों के लिए दर्शन व्यवस्था की समीक्षा करने, कांवड़ियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और सभी श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की।
केशरी ने कहा कि भोरमदेव पहुंचने वाला हर भक्त भगवान भोलेनाथ का अतिथि है और उसकी पहचान उसकी हैसियत से नहीं, बल्कि उसकी आस्था से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के सम्मान और मंदिर की गरिमा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए।