तुलसी (नेवरा) का 15 लाख का डिजिटल कौशल केंद्र बना रहस्य! न भवन दिख रहा, न रास्ता... आखिर जिम्मेदार कौन?
तिल्दा-नेवरा के ग्राम पंचायत तुलसी में डीएमएफ निधि से बने 15 लाख रुपये के डिजिटल कौशल उन्नयन केंद्र की वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन का न तो उपयोग हो रहा है और न ही वहां तक पहुंचने का रास्ता स्पष्ट है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा नेवरा l रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा जनपद पंचायत क्षेत्र से लगे ग्राम पंचायत तुलसी (नेवरा) में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) निधि से वर्ष 2023-24 के दौरान लगभग 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित डिजिटल कौशल उन्नयन केंद्र अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों के कौशल विकास के उद्देश्य से बनाए गए इस केंद्र का न तो अपेक्षित उपयोग हो रहा है और न ही इसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट है।
जानकारी के अनुसार, इस केंद्र का निर्माण कॉलेज रोड स्थित हाई स्कूल के समीप किया गया था। परियोजना का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्र के युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों और बेरोजगारों को डिजिटल तकनीक आधारित प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार करना था। लेकिन निर्माण के बाद से यहां किसी नियमित प्रशिक्षण गतिविधि के संचालन की जानकारी सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल कौशल केंद्र तक पहुंचने का रास्ता भी अब स्पष्ट दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि भवन आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गया है या फिर किसी प्रकार के अतिक्रमण की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी कारण ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस भवन के निर्माण पर सरकारी राशि खर्च की गई, उसका लाभ आज तक क्षेत्र के युवाओं को नहीं मिल पाया। यदि भवन का संचालन नहीं हो रहा है, तो यह जानना आवश्यक है कि परियोजना अपने मूल उद्देश्य तक क्यों नहीं पहुंच सकी। उनका मानना है कि यदि समय पर केंद्र को सक्रिय किया जाता, तो क्षेत्र के अनेक युवाओं को डिजिटल प्रशिक्षण, कंप्यूटर शिक्षा और रोजगारोन्मुखी कौशल का लाभ मिल सकता था।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और संबंधित विभाग से मांग की है कि डिजिटल कौशल उन्नयन केंद्र की वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाए कि भवन वर्तमान में किस स्थिति में है, उसका संचालन किस विभाग के अधीन है, वहां प्रशिक्षण क्यों नहीं चल रहा और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अतिक्रमण हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उन पर खर्च की गई राशि का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे। डिजिटल कौशल केंद्र जैसी परियोजनाएं ग्रामीण युवाओं को तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए ऐसे केंद्रों का नियमित संचालन और प्रभावी निगरानी आवश्यक है।
फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि डिजिटल कौशल उन्नयन केंद्र की वर्तमान स्थिति क्या है, परियोजना का संचालन क्यों प्रभावित हुआ और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर केंद्र को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप पुनः संचालित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा।