बालाघाट के आदिवासी बच्चों की मौत के विरोध में रायपुर में न्याय सत्याग्रह, पीड़ित परिवारों को न्याय की मांग

बालाघाट के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत के विरोध में रायपुर आदिवासी कांग्रेस ने कैंडल मार्च और न्याय सत्याग्रह किया। आंदोलनकारियों ने पीड़ित परिवारों को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई, प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।

Sep 12, 2026 - 08:09
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बालाघाट के आदिवासी बच्चों की मौत के विरोध में रायपुर में न्याय सत्याग्रह, पीड़ित परिवारों को न्याय की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों के विरोध में आदिवासी कांग्रेस की ओर से कैंडल मार्च और न्याय सत्याग्रह आयोजित किया गया। आंदोलन के माध्यम से पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने, मामले में जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई करने और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग उठाई गई। प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की।

11 सितंबर 2026 को आयोजित इस न्याय सत्याग्रह का नेतृत्व रायपुर शहर जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश कृपाल ने किया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष जनक ध्रुव और संगठन महासचिव प्रदेश आदिवासी कांग्रेस कुलदीप ध्रुव के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। आंदोलन में आदिवासी कांग्रेस के जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में कांग्रेसजन शामिल हुए।

न्याय सत्याग्रह और कैंडल मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बालाघाट के आदिवासी परिवारों की स्थिति को लेकर सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना, बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई करना और प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करना प्रमुख रहा। इसके साथ ही आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और ग्रामीण एवं दूरस्थ इलाकों में समय पर चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।

जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश कृपाल ने कहा कि यह विषय केवल बच्चों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल और समय पर चिकित्सा सुविधा जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

दीपेश कृपाल ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना उनका अधिकार है। दूरस्थ इलाकों में अस्पताल, डॉक्टर, दवाइयां और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ बच्चों और परिवारों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों को स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े, इसके लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

आंदोलनकारियों ने इस मुद्दे को बालाघाट के प्रभावित परिवारों के साथ-साथ व्यापक आदिवासी समाज के अधिकार और सम्मान से जोड़ते हुए अपनी आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान पीड़ित परिवारों को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने की मांग प्रमुखता से रखी गई। आदिवासी कांग्रेस ने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने तक इस मुद्दे को उठाया जाता रहेगा। इसके साथ ही प्रदर्शन में स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग भी रखी गई।