महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी बयानबाजी तेज: सीमा अनंत ने केंद्र सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सीमा अनंत ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है और विधेयक को लागू करने में देरी कर रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा अनंत ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
सीमा अनंत ने कहा कि जब देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और आचार संहिता लागू है, ऐसे समय में अचानक महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लाना कई सवाल खड़े करता है। उनके अनुसार, यह कदम महिलाओं के हित में कम और चुनावी रणनीति का हिस्सा अधिक प्रतीत होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर ऐसा विधेयक पेश किया, जिसमें परिसीमन की शर्त जोड़ दी गई, ताकि इसे तत्काल लागू न किया जा सके। उनका कहना है कि सरकार को पहले से ही पता था कि इस तरह का विधेयक विवाद का कारण बनेगा और विपक्ष इसका विरोध करेगा।
सीमा अनंत के अनुसार, यदि विधेयक पारित हो जाता, तो सरकार खुद को महिलाओं का हितैषी बताकर राजनीतिक लाभ लेती। वहीं, यदि विधेयक पारित नहीं होता, तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर जनता के बीच माहौल बनाने की कोशिश की जाती। उन्होंने इसे “दोहरी रणनीति” करार देते हुए कहा कि इससे सरकार की नीयत साफ तौर पर उजागर हो गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, जिसे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था। इसके बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार विभिन्न तकनीकी कारणों का हवाला देकर इसे टाल रही है।
सीमा अनंत ने एक्ट 334A का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार यह कह रही है कि 2026 की जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही इसे लागू किया जा सकता है। लेकिन अब सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर इसे लागू करने की बात कर रही है, जो विरोधाभासी है।
उन्होंने कहा कि यदि 2011 के आंकड़ों को आधार माना जा सकता है, तो वर्तमान लोकसभा में 543 सीटों के आधार पर महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है।
सीमा अनंत ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस और विपक्ष आज भी यह चाहते हैं कि महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि बिना किसी देरी के इस कानून को लागू किया जाए।
इस बयान के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा और भी तूल पकड़ सकता है, खासकर चुनावी माहौल में, जहां महिला मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है।