पोषण माह 2026: छत्तीसगढ़ में पोषण जागरूकता अभियान को मिल रही गति, आंगनबाड़ी केंद्र बने जनभागीदारी के केंद्र

छत्तीसगढ़ में पोषण माह 2026 के तहत बच्चों, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं और किशोरी बालिकाओं के पोषण व स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बलरामपुर के शंकरगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र बचवार में संतुलित आहार, एनीमिया से बचाव, कुपोषण की पहचान, टीकाकरण और मातृ स्वास्थ्य जांच जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।

Sep 12, 2026 - 08:17
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पोषण माह 2026: छत्तीसगढ़ में पोषण जागरूकता अभियान को मिल रही गति, आंगनबाड़ी केंद्र बने जनभागीदारी के केंद्र

UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ में पोषण माह 2026 के तहत बच्चों, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं तथा किशोरी बालिकाओं के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रदेशभर में आंगनबाड़ी केंद्रों को पोषण, स्वास्थ्य और बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों के सक्रिय केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से समुदाय को संतुलित आहार, एनीमिया से बचाव, स्वच्छता, बच्चों की वृद्धि निगरानी और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

पोषण माह के दौरान जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विभागीय अमले द्वारा पोषण संबंधी जानकारी घर-घर और समुदाय तक पहुंचाई जा रही है। इसी क्रम में बलरामपुर जिले के आकांक्षी विकासखंड शंकरगढ़ में भी विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में सुधार लाना तथा निर्धारित लक्ष्यों की संतृप्ति सुनिश्चित करना है। अभियान के तहत स्थानीय समुदाय को पोषण से जुड़ी जानकारी देकर स्वस्थ खान-पान और बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

परियोजना शंकरगढ़ के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र बचवार में पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बच्चों, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं और समुदाय के सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व के साथ एनीमिया से बचाव, स्वच्छता, बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जानकारी दी गई। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री से पौष्टिक व्यंजन तैयार करने और उन्हें दैनिक भोजन में शामिल करने के लिए भी लोगों को प्रोत्साहित किया गया।

पोषण माह के तहत कुपोषण की पहचान और उसके प्रभावी प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। बचवार आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति का आकलन करते हुए गंभीर तीव्र कुपोषित यानी एसएएम और मध्यम तीव्र कुपोषित यानी एमएएम बच्चों का चिन्हांकन किया गया। अभिभावकों को कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के बारे में जानकारी दी गई। गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए आवश्यक उपचार और पोषण प्रबंधन हेतु पोषण पुनर्वास केंद्र यानी एनआरसी की सेवाओं का लाभ लेने के महत्व को भी समझाया गया।

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्चों का टीकाकरण किया। इसके साथ ही माताओं के रक्तचाप और शुगर की जांच भी की गई। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण जागरूकता के साथ मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने में मदद मिल रही है। इस तरह आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण संबंधी जानकारी देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं से लोगों को जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

पोषण माह के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी देकर पंजीयन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र माताएं योजना के लाभ से वंचित न रहें। साथ ही बच्चों और माताओं के पोषण, स्वास्थ्य तथा देखभाल से जुड़ी विभिन्न शासकीय सेवाओं और योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

प्रदेश में संचालित इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य कुपोषण की रोकथाम, बच्चों के पोषण स्तर में सुधार और मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को मजबूत करना है। पोषण माह के माध्यम से समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाकर पोषण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।