बालाघाट के आदिवासी बच्चों की मौत के विरोध में रायपुर में न्याय सत्याग्रह, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग
बालाघाट के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत के विरोध में रायपुर आदिवासी कांग्रेस ने कैंडल मार्च और न्याय सत्याग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित परिवारों को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई, प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों के विरोध में रायपुर आदिवासी कांग्रेस की ओर से कैंडल मार्च और न्याय सत्याग्रह आयोजित किया गया। 11 सितंबर 2026 को हुए इस आंदोलन में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने, मामले में जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई करने और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग उठाई गई। प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की।
यह कार्यक्रम अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष जनक ध्रुव, विकास उपाध्याय और संगठन महासचिव प्रदेश आदिवासी कांग्रेस कुलदीप ध्रुव के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। रायपुर शहर जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश कृपाल के नेतृत्व में हुए न्याय सत्याग्रह में संगठन के जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में कांग्रेसजन शामिल हुए।
आंदोलन के दौरान आदिवासी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बालाघाट के प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और न्याय की मांग प्रमुखता से उठाई। प्रदर्शनकारियों ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी। इसके साथ ही बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग भी की गई।
जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश कृपाल ने कहा कि यह केवल बच्चों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल और समय पर चिकित्सा सुविधा जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं की स्थिति से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
दीपेश कृपाल ने कहा कि आदिवासी बहुल इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की मौजूदगी, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता तथा बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को जमीनी स्तर पर प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि यह लड़ाई केवल बालाघाट के पीड़ित परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के जीवन, अधिकार और सम्मान से जुड़ा विषय है। आदिवासी कांग्रेस ने कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, तब तक इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई जाती रहेगी। आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
कैंडल मार्च और न्याय सत्याग्रह के दौरान कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने, दोषियों पर कार्रवाई करने और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। आंदोलन में शामिल कांग्रेसजनों ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके अधिकारों और न्याय की मांग को आगे भी उठाने की बात कही।