जानकारी के अनुसार, सरपंच मनोज सिन्हा के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में 13 मत पड़े, जबकि उनके पक्ष में 4 मत मिले। एक मत निरस्त होने के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका और सरपंच अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे। परिणाम घोषित होने के बाद ग्रामीणों ने मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले को संदेहास्पद बताया।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और पंचों का आरोप है कि जिस मत को निरस्त किया गया, वह पूरी तरह वैध था। उनका दावा है कि संबंधित मत को जानबूझकर निरस्त किया गया, जिससे अविश्वास प्रस्ताव आवश्यक संख्या तक नहीं पहुंच सका। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदान प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती गई और परिणाम को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि परिणाम घोषित करने में अनावश्यक देरी की गई। बताया गया कि दोपहर 2:30 बजे परिणाम घोषित किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन शाम करीब 5:30 बजे तक भी स्पष्ट घोषणा नहीं हुई। इस दौरान तहसील परिसर में लगातार असमंजस की स्थिति बनी रही और लोगों का आक्रोश बढ़ता गया।
धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण लगातार तहसीलदार और एसडीएम को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे। उनका कहना था कि अधिकारी स्वयं उपस्थित होकर मतदान प्रक्रिया और निरस्त मत के संबंध में स्थिति स्पष्ट करें। हालांकि ग्रामीणों के अनुसार शाम से लेकर रात करीब 7:30 बजे तक कोई वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शन स्थल पर नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि परिणाम पत्रक उपलब्ध कराने में भी आनाकानी क्यों की गई। पंचों का कहना है कि वे इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर से करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी लेंगे। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। पिथौरा थाना प्रभारी सिद्धार्थ मिश्रा और सांकरा थाना प्रभारी उत्तम तिवारी सहित पुलिस की टीम पूरे समय मतदान स्थल पर मौजूद रही।
समाचार लिखे जाने तक ग्रामीणों के आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं, सरपंच मनोज सिन्हा का पक्ष भी प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।