तातापानी महोत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक रंगों की छटा, आदित्य नारायण की प्रस्तुति ने बांधा समां
बलरामपुर के तातापानी महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में स्कूली बच्चों, स्थानीय कलाकारों और बॉलीवुड गायक आदित्य नारायण की शानदार प्रस्तुतियों ने हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
UNITED NEWS OF ASIA.अली खान, बलरामपुर। जिला बलरामपुर-रामानुजगंज के प्रसिद्ध तातापानी महोत्सव के दूसरे दिवस सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्य और रंगारंग श्रृंखला ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों, स्थानीय कलाकारों और आमंत्रित प्रसिद्ध कलाकारों ने एक ही मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। ठंड भरे मौसम के बावजूद हजारों की संख्या में दर्शक कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद उठाया।
कार्यक्रम की शुरुआत जिले के विभिन्न स्कूलों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों से हुई। छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति, तीज-त्योहार और पारंपरिक जीवनशैली की थीम पर आधारित नृत्य प्रस्तुत करते हुए बच्चों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति और तालबद्ध नृत्य को देखकर दर्शक दीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी, जिससे बच्चों का उत्साह और बढ़ गया।
सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण बॉलीवुड के मशहूर गायक आदित्य नारायण रहे, जिन्होंने गायिका शना अरोड़ा के साथ मिलकर अपनी दमदार प्रस्तुति दी। जैसे ही आदित्य नारायण मंच पर आए, उन्होंने लोकप्रिय गीत “सलाम ठोको” से कार्यक्रम की शुरुआत कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने “पहला नशा, पहला खुमार”, “कभी ना कभी” सहित कई सुपरहिट गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनकी मधुर आवाज़ और मंच पर ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुति ने कड़कड़ाती ठंड को भी बेअसर कर दिया।
गीतों का यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा और दर्शक आनंद से झूमते नजर आए। वहीं नावेद ग्रुप द्वारा प्रस्तुत शिव उपासना नृत्य ने आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया और दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम के समापन के पश्चात जिला एवं सत्र न्यायाधीशमंत श्राप, कलेक्टर राजेन्द्र कटारा, पुलिस अधीक्षक वैभव बेंकर एवं डीएफओ आलोक वाजपेयी द्वारा आदित्य नारायण को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही बाहर से आए अन्य कलाकारों को भी उनकी शानदार प्रस्तुतियों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
तातापानी महोत्सव का यह सांस्कृतिक आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और कला को सशक्त मंच प्रदान करने का भी उत्कृष्ट उदाहरण साबित हुआ।