स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं को अत्यधिक दर्द का सामना करना पड़ता है। यह दर्द अक्सर मासिक धर्म के दौरान शुरू होता है और कई मामलों में पूरे मासिक चक्र के दौरान बना रहता है। इससे महिलाओं की दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और कई बार उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति भी बन जाती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बीमारी में अलग-अलग आकार के डिम्बग्रंथि (ओवरी) में अल्सर बनने की समस्या भी हो सकती है। इसके साथ ही श्रोणि क्षेत्र में आसंजन (पेल्विक एडहेजन) और बांझपन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। कई महिलाएं लंबे समय तक इस दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस का उपचार कई मामलों में दवाइयों के माध्यम से संभव होता है। हालांकि यदि अल्सर का आकार बड़ा हो या पेल्विक आसंजन अधिक हो तो लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से इन सर्जरी को न्यूनतम इनवेसिव तरीके से किया जाता है, जिससे मरीज को जल्दी राहत मिलती है और रिकवरी भी तेज होती है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस वर्ष महिला दिवस का वैश्विक विषय “सभी के लिए अधिकार, न्याय और कार्रवाई” रखा गया है। इसके साथ ही “गिव टू गेन” अभियान के माध्यम से महिलाओं और लड़कियों को समर्थन, अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने की अपील की जा रही है।
स्त्री रोग विशेषज्ञों की राष्ट्रीय संस्था फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) द्वारा मार्च 2026 को एंडोमेट्रियोसिस जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत महिलाओं को इस बीमारी के बारे में जानकारी देने और समय पर इलाज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और लगातार होने वाले दर्द को सामान्य न मानें, तो समय रहते उपचार संभव है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के जरिए महिलाओं को दर्दमुक्त जीवन दिया जा सकता है।
इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर चिकित्सकों ने सभी महिलाओं से अपील की है कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, जागरूक रहें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। जब महिलाएं स्वस्थ और सशक्त होंगी, तभी परिवार और समाज भी मजबूत बन पाएगा।