कारगिल के वीरों का बलिदान सदैव प्रेरणास्रोत, विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम : टंक राम वर्मा
रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण, डिजिटल सुरक्षा, अनुशासन और विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सभागार में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कारगिल के रणबांकुरों का बलिदान देश की भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज रहेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, शिक्षा, पर्यावरण और डिजिटल दुनिया में भी नागरिकों की सजगता उतनी ही आवश्यक है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' के माध्यम से अदम्य साहस, वीरता और पराक्रम का परिचय देते हुए कारगिल की दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहराया। यह विजय केवल सैन्य सफलता नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता की विजय थी। उन्होंने वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश उनके योगदान का सदैव ऋणी रहेगा।
उन्होंने कहा कि सच्ची देशभक्ति केवल राष्ट्रीय पर्वों पर उत्सव मनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अपने दैनिक जीवन में ईमानदारी, समय की पाबंदी, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने की आदत, जरूरतमंदों की सहायता तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना भी राष्ट्र सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री के "एक पेड़ मां के नाम" और "वोकल फॉर लोकल" जैसे अभियानों को जनआंदोलन बनाने की अपील की।
डिजिटल युग की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के किसी भी जानकारी को साझा करना समाज में भ्रम और तनाव पैदा कर सकता है। उन्होंने युवाओं से जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने का आह्वान किया। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बाहरी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखी जानी चाहिए ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि देश के भविष्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने में शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को केवल पाठ्य ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, अनुसंधान और राष्ट्रभावना का भी विकास करना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समय-समय पर वीर सैनिकों के सम्मान में संगोष्ठियां, प्रदर्शनियां और प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि युवा पीढ़ी देश के वीरों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सके। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में अपार क्षमता है, जिसे कौशल विकास, शिक्षा और अनुसंधान से जोड़कर राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में पूर्व कुलपति प्रो. एन. पी. दीक्षित, वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. टी. एल. वर्मा, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र पटेल, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन कारगिल के अमर शहीदों को नमन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ किया गया।