तांदुला नदी के कायाकल्प की शुरुआत, ड्रोन सर्वे से तैयार होगी पुनर्जीवन कार्ययोजना

बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी के पुनर्जीवन और इको-रिवरफ्रंट विकास कार्य की शुरुआत हो गई है। जिला प्रशासन और आईआईटी भिलाई की साझेदारी में यूएवी ड्रोन सर्वे कर वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे नदी संरक्षण, जल संवर्धन और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाएगा।

May 16, 2026 - 14:14
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तांदुला नदी के कायाकल्प की शुरुआत, ड्रोन सर्वे से तैयार होगी पुनर्जीवन कार्ययोजना

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। जिला प्रशासन और आईआईटी भिलाई की साझेदारी से तांदुला नदी के पुनरुद्धार और इको-रिवरफ्रंट विकास के लिए यूएवी ड्रोन सर्वेक्षण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से आने वाले समय में तांदुला नदी का स्वरूप पूरी तरह बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।

तांदुला जलाशय के समीप स्थित ग्राम देउरतराई मैदान में आयोजित कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष Pratibha Chaudhary, अपर कलेक्टर Chandrakant Kaushik, एसडीएम बालोद Nutan Kanwar तथा जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता Piyush Devangan सहित जनप्रतिनिधि, आईआईटी भिलाई के विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने यूएवी ड्रोन की पूजा-अर्चना कर सर्वे कार्य की शुरुआत की।

जिला प्रशासन के अनुसार आईआईटी भिलाई की विशेषज्ञ टीम ड्रोन तकनीक की मदद से नदी क्षेत्र का हाई-रिजोल्यूशन सर्वे करेगी। इस सर्वे के आधार पर नदी की जलधारा, तट संरचना, जल गुणवत्ता, मौसमी परिवर्तन और जैव विविधता का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसके माध्यम से नदी संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत तांदुला नदी के चयनित तीन किलोमीटर क्षेत्र में रिवर इकोसिस्टम संरक्षण और रिवरफ्रंट डेवलपमेंट का कार्य प्रस्तावित है। इसके तहत नदी किनारों के विकास, हरियाली बढ़ाने, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

जिला प्रशासन ने बताया कि यह परियोजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसका उद्देश्य नदी को स्वच्छ, संतुलित और सतत स्वरूप प्रदान करना है। इस योजना के तहत नदी के प्राकृतिक प्रवाह को सुरक्षित रखते हुए पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी ने कहा कि तांदुला नदी जिले की पहचान और जीवनरेखा है। इसके संरक्षण के लिए शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में पूरे जिले के लिए लाभकारी साबित होगी। वहीं अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक ने कहा कि नदियां मानव सभ्यता और पर्यावरण का आधार हैं, इसलिए उनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाने वाला यह मॉडल भविष्य में प्रदेश में नदी पुनर्जीवन के लिए एक उदाहरण बन सकता है। जिला प्रशासन का मानना है कि वैज्ञानिक अध्ययन और आधुनिक तकनीक के उपयोग से तांदुला नदी का पुनर्जीवन सफलतापूर्वक किया जा सकेगा।

कार्यक्रम में तहसीलदार आशुतोष शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद तांदुला नदी न केवल पर्यावरण संरक्षण का मॉडल बनेगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय विकास को भी नई दिशा मिलेगी।