स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने छोड़ा माघ मेला परिसर, बिना स्नान लौटना पड़ा; बोले– इस तरह वापस जाना पीड़ादायक
माघ मेला में उत्पन्न परिस्थितियों से आहत होकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना संगम स्नान किए ही मेला परिसर छोड़ दिया। उन्होंने इसे आस्था और परंपरा के लिए पीड़ादायक क्षण बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रयागराज। माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला परिसर छोड़ने का निर्णय ले लिया है। बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वे श्रद्धा और आस्था के साथ संगम स्नान के लिए माघ मेला आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि उन्हें बिना स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है, जो उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रयागराज सनातन परंपराओं, विश्वास और शांति की भूमि रही है। ऐसे पवित्र स्थल से इस प्रकार लौटना उनके मन को गहरा आघात पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि माघ मेला में संगम स्नान केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक है। इसके बावजूद मौजूदा हालात में उन्होंने मेला छोड़ने का कठिन फैसला लिया है।
गौरतलब है कि बीते दिनों मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे, जिससे संगम क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन गई। इसी दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी संगम स्नान के लिए पहुंचे थे, लेकिन प्रशासन ने भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
प्रशासन द्वारा रथ से उतरकर पैदल जाने के आग्रह पर उनके भक्तों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। शंकराचार्य ने आरोप लगाया है कि इस दौरान पुलिस द्वारा संतों और भक्तों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन ने उन्हें रोका, तब वे सहयोग के लिए तैयार थे और वापस लौटने लगे थे, लेकिन उसी दौरान पुलिस ने संतों और श्रद्धालुओं पर बल प्रयोग किया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज के सम्मान और सनातन परंपराओं की रक्षा अत्यंत आवश्यक है। बिना संगम स्नान किए माघ मेला छोड़ना उनके लिए एक पीड़ादायक निर्णय है, जिसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगे।