आत्महत्या रोकथाम जागरूकता सप्ताह के तहत विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन की दी गई जानकारी
कवर्धा के शासकीय हाईस्कूल कैलाश नगर में आत्महत्या रोकथाम जागरूकता सप्ताह के तहत विद्यार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को परीक्षा तनाव, चिंता, अवसाद और कठिन परिस्थितियों में संवाद व सहयोग के महत्व की जानकारी दी गई।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा l विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर 07 से 12 सितंबर 2026 तक आयोजित आत्महत्या रोकथाम जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत शासकीय हाईस्कूल कैलाश नगर, कवर्धा में विद्यार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, तनावपूर्ण परिस्थितियों को समझने और उनसे सकारात्मक तरीके से निपटने के लिए प्रेरित करना तथा जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता लेने के महत्व को समझाना रहा।
इस वर्ष जागरूकता सप्ताह की थीम “चेंजिंग द नैरेटिव ऑन सुसाइड” और “कॉल टू एक्शन: स्टार्ट द कन्वर्सेशन” रखी गई है। इसी संदेश के अनुरूप विद्यार्थियों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम कलेक्टर तुलिका प्रजापति के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी. के. तुर्रे और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. के. के. ध्रुव के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनुपमा तिवारी एवं जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद चंद्रवंशी ने भी कार्यक्रम के संचालन एवं जागरूकता गतिविधियों के लिए मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि तनाव, चिंता या किसी कठिन परिस्थिति का सामना करने पर अपनी परेशानियों को मन में दबाकर रखने के बजाय भरोसेमंद लोगों से बातचीत करना महत्वपूर्ण है। परिजन, मित्र, शिक्षक अथवा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ विद्यार्थियों को उनकी परिस्थितियों को समझने और उचित सहयोग प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। समय पर संवाद और सहयोग से मानसिक परेशानियों से निपटने के बेहतर रास्ते तलाशे जा सकते हैं। विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बातचीत करना कमजोरी नहीं, बल्कि जागरूकता और समझदारी का संकेत है।
जागरूकता कार्यक्रम में अवसाद, अत्यधिक चिंता, परीक्षा संबंधी तनाव और डर जैसे विषयों पर भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को तनाव के संकेतों को पहचानने, अपनी भावनाओं को समझने और उन्हें उचित व्यक्ति के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया गया। पढ़ाई और परीक्षा से जुड़े दबाव के बीच सकारात्मक सोच बनाए रखने, समस्या आने पर अकेले रहने के बजाय संवाद करने और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लेने के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि आत्महत्या रोकथाम जागरूकता सप्ताह का उद्देश्य केवल एक दिन तक सीमित जागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। मानसिक परेशानियों से जुड़ी सामाजिक झिझक और भ्रांतियों को कम करना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। विद्यार्थियों को समझाया गया कि किसी भी मानसिक परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सहायता और परामर्श लेना जरूरी है।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनने, अपने आसपास के लोगों की परेशानियों को समझने और जरूरत के समय सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया। जागरूकता सप्ताह के दौरान इस तरह की गतिविधियों के जरिए स्कूलों और समुदायों में मानसिक स्वास्थ्य पर खुले संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।