धमतरी में महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद, हिंदू या ईसाई रीति से संस्कार पर दो मत

धमतरी जिले के बेलरगांव के पास नवागांव में एक महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार की रीति को लेकर विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि महिला ने कुछ वर्ष पहले ईसाई धर्म अपनाया था। अंतिम संस्कार हिंदू परंपरा से हो या ईसाई रीति-रिवाज से, इसे लेकर गांव में अलग-अलग मत सामने आए हैं। विवाद के समाधान के लिए बैठक बुलाई गई है।

Sep 10, 2026 - 11:44
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धमतरी में महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद, हिंदू या ईसाई रीति से संस्कार पर दो मत

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। मामला नगरी ब्लॉक के बेलरगांव के पास स्थित नवागांव का बताया जा रहा है। महिला की मौत के बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि उनका अंतिम संस्कार किस धार्मिक परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार किया जाए। इस मुद्दे को लेकर गांव में अलग-अलग मत सामने आने के बाद मामले ने विवाद का रूप ले लिया है।

जानकारी के अनुसार मृतका की पहचान महेश्वरी साहू के रूप में बताई जा रही है। वह साहू समाज से संबंधित थीं। स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पहले उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था। हालांकि, धर्म परिवर्तन से संबंधित इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि की स्थिति स्पष्ट नहीं है। महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर इसी धार्मिक पहचान और पारिवारिक-सामाजिक परंपराओं के बीच सवाल खड़ा हुआ है।

एक पक्ष का कहना है कि मृतका साहू समाज से थीं, इसलिए उनका अंतिम संस्कार समाज की परंपरा और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार किया जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर उनके कथित रूप से ईसाई धर्म अपनाने के कारण ईसाई धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किए जाने की बात सामने आ रही है। इसी मुद्दे को लेकर गांव में दो अलग-अलग मत बन गए हैं। अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील विषय पर मतभेद बढ़ने के बाद स्थानीय स्तर पर स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में बड़ी बैठक बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस बैठक में विवाद से जुड़े पक्षों और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। बैठक में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर सभी पक्षों की राय सामने आने की संभावना है। फिलहाल लोगों की नजरें इस बैठक के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

ग्रामीण स्तर पर सामने आए इस विवाद ने धर्म, सामाजिक परंपरा और व्यक्ति की धार्मिक मान्यता से जुड़े सवालों को भी चर्चा में ला दिया है। ऐसे मामलों में परिवार की इच्छा, मृतक की मान्यताओं और संबंधित सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण समाधान निकालना महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर भी विवाद को बढ़ने से रोकने तथा आपसी सहमति बनाने की कोशिश की जा सकती है।

नवागांव में सामने आया यह मामला अब गांव की बैठक के जरिए किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की निगाहें हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी हो सकती है। वहीं यदि मतभेद कायम रहते हैं तो विवाद आगे भी बढ़ सकता है। फिलहाल बैठक के बाद ही स्थिति और अंतिम निर्णय को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।