बिहार की ताइक्वांडो खिलाड़ी स्नेहा एस कुमार को ₹3 लाख की खेल स्कॉलरशिप, रचा नया इतिहास

बिहार सरकार की "मेडल लाओ, नौकरी पाओ एवं खेल स्कॉलरशिप योजना" के तहत पटना की ताइक्वांडो खिलाड़ी स्नेहा एस कुमार को ₹3 लाख की खेल स्कॉलरशिप प्रदान की गई। वह इस योजना का लाभ पाने वाली पटना की पहली ताइक्वांडो खिलाड़ी बन गई हैं।

Jul 26, 2026 - 15:36
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बिहार की ताइक्वांडो खिलाड़ी स्नेहा एस कुमार को ₹3 लाख की खेल स्कॉलरशिप, रचा नया इतिहास

UNITED NEWS OF ASIA. पटना। बिहार सरकार के खेल विभाग एवं बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा संचालित "मेडल लाओ, नौकरी पाओ एवं खेल स्कॉलरशिप योजना" के अंतर्गत पटना की प्रतिभाशाली ताइक्वांडो खिलाड़ी स्नेहा एस कुमार को ₹3 लाख की खेल स्कॉलरशिप प्रदान की गई है। इस उपलब्धि के साथ स्नेहा ने नया इतिहास रचते हुए पटना जिले की पहली ताइक्वांडो खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया है, जिन्हें इस प्रतिष्ठित योजना का लाभ मिला है। स्कॉलरशिप के साथ उन्हें नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया, जिससे उनके उज्ज्वल खेल भविष्य को नई दिशा मिली है।

स्नेहा एस कुमार पिछले छह वर्षों से किलकारी संस्थान में नियमित रूप से ताइक्वांडो का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने कठिन परिश्रम, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई। किलकारी में समय-समय पर बाहरी विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण शिविरों का भी उन्हें लाभ मिला, जिससे उनके खेल कौशल में लगातार निखार आया।

राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न ताइक्वांडो प्रतियोगिताओं में स्नेहा ने बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए कई स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक अपने नाम किए हैं। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने न केवल राज्य का गौरव बढ़ाया, बल्कि बिहार की महिला खिलाड़ियों के लिए भी नई प्रेरणा प्रस्तुत की है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह उन्हें अवसर और सुविधाएं मिलती रहीं तो वह भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

स्नेहा की खेल यात्रा में वर्ष 2025 एक महत्वपूर्ण पड़ाव लेकर आया था। उनका चयन सर्बिया के ज़लतीबोर शहर में आयोजित इंटरनेशनल ताइक्वांडो स्कूल गेम्स के लिए हुआ था। यह प्रतियोगिता 4 से 14 अप्रैल 2025 तक आयोजित की गई थी। हालांकि, खेल मंत्रालय से आवश्यक सर्कुलर समय पर जारी नहीं होने के कारण वह इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकीं। यदि उन्हें भाग लेने का अवसर मिलता, तो वह ताइक्वांडो में बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली खिलाड़ी बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ातीं।

स्नेहा की इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। परिवार ने हमेशा उनकी प्रतिभा पर विश्वास जताया और प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं तथा अनुशासन के हर चरण में उनका पूरा सहयोग किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार ने खेल को प्राथमिकता दी और स्नेहा को आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। यही सहयोग उनकी सफलता की मजबूत नींव बना।

बिहार सरकार की "मेडल लाओ, नौकरी पाओ एवं खेल स्कॉलरशिप योजना" का उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। इस योजना के माध्यम से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और भविष्य की सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे राज्य में खेल संस्कृति को नई मजबूती मिल सके।

स्नेहा एस कुमार की सफलता बिहार के हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह उपलब्धि बताती है कि समर्पण, निरंतर अभ्यास, सही मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता से राज्य के खेल जगत में उत्साह का माहौल है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में बिहार से और भी खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

स्नेहा की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि बिहार में उभरती खेल प्रतिभाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है कि मेहनत और लगन से हर सपना साकार किया जा सकता है। सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं और परिवार का सहयोग मिलने पर युवा खिलाड़ी देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन करने की क्षमता रखते हैं।