सिम्स बिलासपुर में पहली बार VATS तकनीक से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन का सफल उपचार

सिम्स बिलासपुर ने पहली बार वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन से पीड़ित 57 वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया। इस उपलब्धि से अब फेफड़ों से जुड़ी जटिल बीमारियों का आधुनिक इलाज प्रदेश में ही उपलब्ध हो सकेगा।

Jul 22, 2026 - 11:37
Jul 22, 2026 - 11:49
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सिम्स बिलासपुर में पहली बार VATS तकनीक से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन का सफल उपचार

UNITED NEWS OF ASIA. बिलासपुर l छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक के माध्यम से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन से पीड़ित 57 वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया है। इस सफलता के साथ अब फेफड़ों और वक्ष से जुड़ी कई जटिल बीमारियों का आधुनिक उपचार सिम्स में ही संभव हो सकेगा। इससे मरीजों को इलाज के लिए बड़े महानगरों या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार मरीज पिछले लगभग तीन महीने से लगातार बुखार से पीड़ित था। शुरुआती दौर में उसने निजी चिकित्सकों से उपचार कराया और टाइफाइड की दवाइयां भी लीं, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिली। बाद में फिर बुखार शुरू हो गया। विस्तृत जांच और सोनोग्राफी में दाहिने फेफड़े के आसपास अत्यधिक मात्रा में पानी जमा होने की पुष्टि हुई।

इसके बाद मरीज को सिम्स के क्षय रोग विभाग में भर्ती किया गया। जांच में ट्यूबरक्लोसिस प्लूरल इफ्यूजन की पुष्टि होने पर एंटी ट्यूबरक्लोसिस ट्रीटमेंट (ATT) शुरू किया गया। हालांकि उपचार के दौरान बार-बार प्लूरल टैपिंग करने के बावजूद फेफड़े के आसपास पानी दोबारा भरने लगा। मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे जनरल सर्जरी विभाग भेजा गया।

जनरल सर्जरी विभाग ने मरीज का विस्तृत मूल्यांकन किया और टीबी विभाग तथा एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों के साथ समन्वय कर आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान फेफड़े के आसपास जमा द्रव को सफलतापूर्वक निकाला गया। साथ ही आवश्यक डिकॉर्टिकेशन और बायोप्सी भी की गई। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। वर्तमान में मरीज स्वस्थ है और नियमित फॉलो-अप पर है।

यह जटिल सर्जरी जनरल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न की। ऑपरेशन में टीबी विभाग, एनेस्थीसिया विभाग और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रबंधन और ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की सक्रिय भूमिका से पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई।

सिम्स प्रशासन के अनुसार संस्थान में VATS मशीन उपलब्ध होने के बाद यह पहली सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। पहले इस तरह के लगभग 10 से 12 मरीज हर महीने सिम्स पहुंचते थे, लेकिन आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण उन्हें अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता था। अब यह सुविधा उपलब्ध होने से प्रदेश के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही उन्नत चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।

चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि निजी अस्पतालों में वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी पर सामान्यतः एक से दो लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि सिम्स में यह उपचार निर्धारित शासकीय शुल्क पर उपलब्ध है। पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत भी इस सुविधा का लाभ मिल सकता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक राहत मिलने के साथ अन्य शहरों में इलाज कराने की परेशानी से भी मुक्ति मिलेगी।

विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि लगातार बुखार, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या फेफड़ों में पानी भरने जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर बीमारियों का सफल इलाज संभव है। उनका कहना है कि VATS जैसी न्यूनतम इनवेसिव तकनीक के जरिए मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव, जल्दी रिकवरी और अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहने जैसे कई लाभ मिलते हैं।

सिम्स में इस अत्याधुनिक सुविधा की शुरुआत को प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे अब छत्तीसगढ़ के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाला, किफायती और आधुनिक उपचार अपने ही राज्य में उपलब्ध हो सकेगा।